
नई दिल्ली। केन्द्र सरकार किसानों को मिल रहे बीज की बेहतर गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए विधेयक लाने जा रही है जिसमें कड़े प्रावधान किए गए हैं। कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शुक्रवार को मीडिया से बातचीत में इसकी जानकारी दी।
अपने आवास पर मीडिया से बातचीत में कृषि मंत्री ने कहा कि पुराने 1966 के बीज अधिनियम में दंड के प्रावधान काफी कमजोर हैं। किसानों को घटिया और नकली बीजों से बचाने और जानबूझकर इन्हें बेचने वालों को कड़ी सजा देने के लिए एक मजबूत कानून की आवश्यकता थी। हम यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि किसानों को अच्छी गुणवत्ता वाले बीज मिलें।
शिवराज ने कहा कि नकली या खराब गुणवत्ता वाला बीज बेचने डीलरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और उन्हें पहले से अधिक जुर्माना भी भरना पड़ेगा।
उन्होंने कहा, “हमारा लक्ष्य है कि किसान को गुणवत्तापूर्ण बीज मिले जो कंपनियां ईमानदारी से काम कर रही हैं उन्हें बढ़ावा मिलेगा, लेकिन जो किसानों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करेंगी, उन्हें डरना होगा।”
उन्होंने बताया कि किसान की एक बड़ी शिकायत थी कि कई बार वे जो बीज खरीदते हैं, वो या तो घटिया निकलता है या नकली निकलता है। दावे कुछ किए जाते हैं, निकल कुछ जाता है। तो अब इससे निजात दिलाने की जरूरत है। वर्तमान में 1966 का बीज अधिनियम प्रभावी है, जिसमें केवल 500 रुपये जैसे मामूली जुर्माने का प्रावधान था। इसका फायदा उठाकर कई कंपनियां और डीलर किसानों को घटिया बीज बेचकर बच निकलते थे। नए प्रस्ताव के अनुसार जानबूझकर धोखाधड़ी करने पर भारी जुर्माने के साथ कड़ी सजा दी जाएगी।
मंत्री ने स्पष्ट किया है कि नए नियम केवल व्यावसायिक कंपनियों पर लागू होंगे। परंपरागत बीजों के विनिमय पर किसानों को पूरी छूट रहेगी। किसान अपना खुद का बीज बो सकते हैं। आपस में बीजों का लेनदेन या स्थानीय स्तर पर बीजों का विनिमय (जैसे सवा गुना वापस करने की प्रथा) जारी रहेगा। इन नियमों से छोटे और पारंपरिक किसानों के अधिकारों पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
उन्होंने बताया कि नई व्यवस्था में बीजों की पूरी उत्पत्ति और आपूर्ति-श्रृंखला का पता लगाने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। क्यूआर कोड के माध्यम से यह पता चल सकेगा कि बीज कहां उत्पादित हुआ, किसने बनाया और किस रास्ते से किसान तक पहुंचा। इससे खराब या नकली बीज बाजार में आने से रोके जा सकेंगे और दोषियों पर कार्रवाई संभव होगी। साथ ही, बीज कंपनियों का अनिवार्य पंजीकरण होगा, जिससे अनधिकृत बीज बिक्री पर भी प्रभावी नियंत्रण लगाया जा सकेगा।
उन्होंने कहा कि अगर पता लगने के बाद यह साबित होता है कि बीज घटिया था, अंकुरित नहीं हुआ या किसानों को नुकसान पहुंचा, तो अब उसके लिए कड़े दंडात्मक प्रावधान प्रस्तावित किए गए हैं। अभी तक केवल 500 रुपये तक का जुर्माना था, लेकिन अब इसे बढ़ाकर 30 लाख रुपये तक करने का सुझाव है। यदि यह पाया जाता है कि यह अपराध जानबूझकर किया गया है, तो सजा का भी प्रावधान होगा।














