मकर संक्रांति पर क्यों खाई जाती है खिचड़ी? रोटी खाने से क्या होता है…

Makar Sankranti : आज पूरे देश में मकर संक्रांति का त्योहार धूमधाम और श्रद्धा के साथ मनाया जा रहा है। इस मौके पर संगम तट पर आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा है। विभिन्न स्नान घाटों पर श्रद्धालुओं और कल्पवासियों ने गंगा और संगम में पुण्य की डुबकी लगाई है। मेले प्रशासन के अनुसार, सुबह आठ बजे तक करीब 21 लाख श्रद्धालुओं ने स्नान किया है। इस अनुमान के अनुसार, दिनभर चलते हुए मुहूर्त के कारण शाम तक यह संख्या एक करोड़ से भी अधिक पहुंच सकती है।

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में घने कोहरे के बीच यह धार्मिक आयोजन जारी है, जहां श्रद्धालु संगम घाट पर स्नान करने पहुंच रहे हैं। मकर संक्रांति का त्योहार उत्तर भारत, खासतौर पर प्रयागराज, वाराणसी, हरिद्वार जैसे धार्मिक स्थलों पर बेहद धूमधाम से मनाया जाता है। यह त्योहार न केवल धार्मिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह मौसमी बदलाव का भी प्रतीक है। घर-घर में तिल-गुड़ की मिठाइयां बनाने और खिचड़ी पकाने की परंपरा है। जैसे ही यह त्योहार आता है, घरों में खिचड़ी की खुशबू फैलने लगती है, और परिवार वाले मिलकर इसे बड़े चाव से खाते हैं।

आईए, अब यह जानते हैं कि मकर संक्रांति पर खिचड़ी ही क्यों खाई जाती है। आम तौर पर लोग सोचते हैं कि मकर संक्रांति पर खिचड़ी ही क्यों बनती है, रोटी क्यों नहीं? इस सवाल का जवाब सिर्फ धार्मिक नियम नहीं है, बल्कि यह हमारे खानपान की पुरानी समझ और मौसम के अनुसार ढले हुए भोजन संस्कृति का परिणाम है। मौसम बदलने के साथ ही शरीर को ऐसी ऊर्जा और गर्माहट देने वाले भोजन की आवश्यकता होती है, जो आसानी से पच भी जाए।

मकर संक्रांति के दौरान मौसम में बदलाव शुरू हो जाता है। कड़ाके की सर्दी धीरे-धीरे कम होने लगती है, और शरीर को अंदर से गर्म रखने वाले पौष्टिक भोजन की जरूरत महसूस होती है। पुराने समय से चली आ रही परंपरा के अनुसार, इस दिन हल्के और पौष्टिक भोजन बनाए जाते हैं। खिचड़ी, जिसमें दाल और चावल होते हैं, आसानी से पच जाती है, पेट पर भारी नहीं पड़ती, और ऊर्जा भी प्रदान करती है। यही कारण है कि उत्तर भारत के कई हिस्सों में इस त्योहार को ‘खिचड़ी का त्योहार’ कहा जाता है, और इस दिन खिचड़ी मुख्य भोजन बन जाती है।

रोटी न बनाने के पीछे कई धार्मिक मान्यताएं भी हैं। यह त्योहार नई फसल की कटाई की खुशी में मनाया जाता है। इस दिन चावल, दाल का दान भी किया जाता है, और खिचड़ी के रूप में खाई जाती है। माना जाता है कि उबले या धीमी आंच पर पकने वाले भोजन अधिक पचने योग्य होते हैं। वहीं, तवे की तेज आंच पर पकने वाली रोटी को इस दिन वर्जित माना जाता है। इसलिए, कई घरों में इस दिन बड़े बर्तन में पकाने का रिवाज है, ताकि भोजन हल्का और आसान पचने वाला हो। यह भी जानना जरूरी है कि मकर संक्रांति पर रोटी न बनाने का कोई सख्त नियम नहीं है; यह बस एक परंपरा है, जो पीढ़ियों से चली आ रही है।

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