
- भारत तिब्बत समन्वय संघ के पाँच वर्ष पूरे होने पर आयोजित बैठक में जुटे कार्यकर्ता
लखनऊ : भारत-तिब्बत समन्वय संघ के 5 वर्ष पूर्ण होने पर लखनऊ में राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष (युवा) डॉ. आशीष सिंह के विद्यालय (श्री अयोध्या सिंह मेमोरियल इंटर कॉलेज, चिनहट) में एक बैठक आयोजित हुई। इसमें सभी को केंद्रीय संयोजक हेमेंद्र तोमर का पाथेय मिला।
उन्होंने कहा कि हिंदुत्व को सबल करने का समय आ गया है। इसे मजबूरी कहिए या जरूरत, लेकिन हिंदुओं का अब केवल आखिरी देश यही बचा है। इसलिए स्वयं को सबल, समर्थ और शक्तिशाली बनाइए हर स्तर पर क्योंकि कैलाश मानसरोवर की मुक्ति तथा तिब्बत की स्वतंत्रता के लिए हिंदुओं को यह करना ही होगा।
उन्होंने मालवा प्रांत के अपने हालिया प्रवास का उल्लेख करते हुए वहां के कार्यकर्ताओं के समर्पण और उत्साह के संस्मरण साझा किए। उन्होंने धार जिले में सरस्वती कंठावर्ण पर इस्लामिक अतिक्रमण को देश की संस्कृति पर अत्याचार का जीवंत और अत्यंत कष्टदायक साक्ष्य बताया। उन्होंने कहा कि ज्ञान ने ही भारत को विश्वगुरु बनाया था और भारत की ज्ञान-परंपरा ही हमारी समृद्धि की द्योतक रही है। इसलिए मां सरस्वती के मंदिर के पुनरोद्धार के बिना देश को पुनः विकसित भारत या विश्वगुरु बनाने का स्वप्न देखना बेमानी है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक हिंदू को धार के भोजशाला सरस्वती मंदिर जाना चाहिए।

इस अवसर पर राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष (युवा) डॉ. आशीष सिंह और प्रांत अध्यक्ष (अवध) हिमांशु सिंह का भी मार्गदर्शन प्राप्त हुआ। कार्यक्रम में राष्ट्रीय मंत्री डॉ. विक्रम बिसेन, राष्ट्रीय सह मंत्री राज नारायण, राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य श्रीमती संज्ञा शर्मा, राष्ट्रीय मंत्री (महिला) डॉ. कल्पना सिंह, राष्ट्रीय मंत्री (युवा) अनूप बाजपेई, राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य (युवा) दुर्गा प्रसाद सिंह, प्रांत उपाध्यक्ष अमिताभ सिन्हा, पूर्व क्षेत्रीय महामंत्री (युवा) उपेंद्र वर्मा, क्षेत्रीय उपाध्यक्ष (युवा) आनंद सिंह एवं लाल बाबू तिवारी, जिला मंत्री (महिला) श्रीमती नीलम त्रिपाठी, जिला उपाध्यक्ष (युवा) नीरज सिंह तथा नवागत बंधुओं में रत्नेश मिश्रा, चंचल कुमार झा, अर्पण सिंह, मनीष परिहार एवं पायल आदि उपस्थित रहे।

इस अवसर पर भगवान जी के फ्रेम किए गए चित्र एवं डायरी डॉ. आशीष सिंह के सौजन्य से सभी को भेंट की गई। कार्यक्रम के अंत में राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य शैलेंद्र कुमार सिंह (लखनऊ) के पिता जी के निधन पर दो मिनट का मौन रखा गया। तदोपरांत कैलाश मानसरोवर मुक्ति महासंकल्प भी कराया गया।










