आस्था, परंपरा और दान का पर्व मकर संक्रांति; एटा में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया

एटा : सूर्य के मकर राशि में प्रवेश के साथ ही आस्था, दान और सामाजिक समरसता का महापर्व मकर संक्रांति जनपद एटा में पूरे श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। सुबह से ही गंगा स्नान, सूर्य उपासना, दान-पुण्य और पारंपरिक आयोजनों का सिलसिला शुरू हो गया, जो दिनभर चलता रहा। ठंड के बावजूद लोगों में पर्व को लेकर खासा उत्साह देखने को मिला।

सूर्य उपासना और स्नान-दान का महत्व

ब्राह्म मुहूर्त से ही श्रद्धालुओं ने नदियों, तालाबों एवं जलाशयों पर पहुंचकर स्नान किया और उगते सूर्य को अर्घ्य अर्पित किया। मान्यता है कि मकर संक्रांति से सूर्य उत्तरायण होता है, जिससे शुभ कार्यों की शुरुआत होती है। इसी विश्वास के साथ लोगों ने दान-पुण्य कर पुण्य अर्जित किया।

दान में दिखी उदारता

पर्व पर जरूरतमंदों को ऊनी वस्त्र, कंबल, अन्न, तिल, गुड़, चावल और दाल का दान किया गया। कई सामाजिक संगठनों एवं भामाशाहों ने गरीबों, वृद्धजनों और असहाय लोगों के बीच भोजन व गर्म कपड़े वितरित किए। शहर के विभिन्न चौराहों और धार्मिक स्थलों पर दान शिविर लगाए गए।

तिल-गुड़ की मिठास, रिश्तों में अपनापन

हर घर में तिल-गुड़, गजक, रेवड़ी और मूंगफली की खुशबू फैली रही। लोगों ने एक-दूसरे को तिल-गुड़ खिलाकर “तिल-गुड़ घ्या, गोड-गोड बोला” की परंपरा निभाई और आपसी सौहार्द का संदेश दिया। महिलाओं ने विशेष पूजा-अर्चना कर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की।

पतंगों से सजा आसमान

मकर संक्रांति के अवसर पर बच्चों और युवाओं में पतंगबाजी का खासा उत्साह रहा। सुबह से शाम तक छतों पर पतंगों की रंगीन छटा दिखाई दी। “वो काटा… वो मारा” के शोर से आसमान गूंजता रहा। प्रशासन द्वारा भी सुरक्षा के मद्देनज़र सतर्कता बरती गई।

धार्मिक व सामाजिक आयोजनों की धूम

मंदिरों में विशेष पूजा, हवन और भंडारों का आयोजन हुआ। वहीं कई स्थानों पर खिचड़ी भोज का आयोजन कर श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया। वृद्धाश्रमों, आश्रय स्थलों और झुग्गी बस्तियों में सेवा कार्य कर समाजसेवियों ने पर्व को सार्थक बनाया।

पर्व ने दिया एकता और सेवा का संदेश

मकर संक्रांति ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि यह केवल एक पर्व नहीं, बल्कि समाज को जोड़ने और सेवा के माध्यम से मानवता को मजबूत करने का अवसर है। दान, श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाए गए इस पर्व ने एटा जनपद में सकारात्मक ऊर्जा का संचार किया।

मकर संक्रांति पर एटा में आस्था, परंपरा और सामाजिक समरसता का सुंदर संगम देखने को मिला।

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