
Jhansi : राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT), प्रधान पीठ, नई दिल्ली ने झांसी स्थित लक्ष्मी तालाब से जुड़े अतिक्रमण, प्रदूषण एवं अवैध निर्माण के गंभीर मामले में सख्त रुख अपनाते हुए संयुक्त जांच समिति के गठन का आदेश दिया है। अधिकरण ने स्पष्ट किया है कि यदि लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह अधिकरण के पूर्व आदेशों तथा उत्तर प्रदेश शासन द्वारा दिए गए आश्वासनों का गंभीर उल्लंघन माना जाएगा। यह आदेश मूल आवेदन संख्या 165/2021 एवं निष्पादन आवेदन संख्या 38/2022 में पारित किया गया है। इससे पूर्व, दिनांक 14.09.2022 को NGT ने उत्तर प्रदेश के प्रमुख सचिव, नगरीय विकास द्वारा दिए गए आश्वासन को अभिलेखित किया था, जिसमें लक्ष्मी तालाब को अतिक्रमण व प्रदूषण से मुक्त कराने तथा विधि के शासन को सुनिश्चित करने की बात कही गई थी।
अतिरिक्त अभ्यावेदन में गंभीर आरोप
आवेदकों द्वारा दिनांक 31.12.2025 को प्रस्तुत अतिरिक्त अभ्यावेदन में आरोप लगाया गया कि प्रकरण अधिकरण के समक्ष विचाराधीन रहते हुए भी लक्ष्मी तालाब एवं उसके जलागम (कैचमेंट) क्षेत्र में बड़े पैमाने पर पाटने, कंक्रीटीकरण एवं स्थायी निर्माण किए गए। साथ ही यह भी कहा गया कि नगर निगम द्वारा वर्षों से शहर के विभिन्न क्षेत्रों से निकलने वाला अशोधित सीवेज, पशु अवशेष तथा प्रदूषित अपशिष्ट जल सीधे तालाब में प्रवाहित किया गया, जिससे तालाब की प्राकृतिक संरचना और पर्यावरणीय संतुलन को गंभीर क्षति पहुँची।
इन आरोपों को प्रथम दृष्टया गंभीर मानते हुए NGT ने कहा कि यदि ये तथ्य सही सिद्ध होते हैं, तो यह प्रमुख सचिव, नगरीय विकास, उत्तर प्रदेश द्वारा दिए गए आश्वासन के अनुपालन में विफलता को दर्शाता है।
54 करोड़ रुपये के दुरुपयोग का आरोप, NGT का कड़ा संदेश
सुनवाई के दौरान आवेदक की ओर से यह भी कहा गया कि लक्ष्मी तालाब को बर्बाद कर लगभग 54 करोड़ रुपये का बंदरबाट किया गया है। यह धनराशि तालाब के संरक्षण, सौंदर्यीकरण एवं विकास के नाम पर खर्च दिखाई गई, जबकि वास्तविकता में तालाब की प्राकृतिक स्थिति को ही नष्ट कर दिया गया।
इस पर NGT ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वास्तविक स्थिति और दोषी अधिकारियों का पता लगाने के लिए ही संयुक्त समिति गठित की जा रही है, और यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो तालाब पर खर्च की गई पूरी धनराशि दोषी अधिकारियों/प्राधिकरणों से वसूल की जाएगी। अधिकरण ने यह भी टिप्पणी की कि यह पैसा जनता का है, और इसके दुरुपयोग को किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता।
आवेदक भानू सहाय का बयान
आवेदक भानू सहाय ने अपने अतिरिक्त अभ्यावेदन में कहा कि लक्ष्मी तालाब प्रकरण विचाराधीन रहते हुए भी संबंधित अधिकारियों एवं विभागों द्वारा जानबूझकर और सुनियोजित ढंग से माननीय सर्वोच्च न्यायालय तथा NGT द्वारा पारित आदेशों, दिशा-निर्देशों एवं उनके अनुपालन हेतु जारी शासनादेशों की अवहेलना की गई है।
उन्होंने कहा कि लक्ष्मी तालाब का कुल जलागम क्षेत्रफल 33.068 हेक्टेयर है, जिसमें से एक बड़े हिस्से को अवैध रूप से तालाब की प्राकृतिक परिधि से बाहर कर पाट दिया गया और कंक्रीटीकरण कर स्थायी निर्माण किए गए। इससे जलाशय की प्राकृतिक संरचना, जलागम व्यवस्था और पर्यावरणीय संतुलन को गंभीर एवं अपूरणीय क्षति पहुँची है।
भानू सहाय ने यह भी आरोप लगाया कि नगर निगम द्वारा वर्षों से शहर के विभिन्न क्षेत्रों से निकलने वाला अशोधित सीवेज, पशु अवशेष एवं प्रदूषित अपशिष्ट जल सीधे लक्ष्मी तालाब में प्रवाहित किया गया, जिससे तालाब में कई फीट तक गाद (स्लज) जमा हो गई। बाद में निर्माण व ध्वस्तीकरण से उत्पन्न मलबे को उसी गाद में डालकर तालाब की जलागम भूमि को पाटने का कार्य किया गया, जो पर्यावरणीय कानूनों और जल संरक्षण के सिद्धांतों का घोर उल्लंघन है।
नरेन्द्र कुशवाहा का बयान
निष्पादन आवेदन संख्या 38/2022 दायर करने वाले आवेदक नरेन्द्र कुशवाहा ने कहा कि जब लक्ष्मी तालाब में बड़े पैमाने पर कंक्रीटीकरण किया जा रहा था, उसी दौरान उन्होंने NGT के समक्ष स्थगन आवेदन दाखिल किया था। इसके बाद संबंधित अधिकारियों द्वारा उन्हें प्रकरण की पैरवी से रोकने और दबाव बनाने के उद्देश्य से उनके एवं उनके परिवार के विरुद्ध झूठे आपराधिक मुकदमे दर्ज कराए गए, जिसके परिणामस्वरूप उन्हें जेल भेज दिया गया।
उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी अनुपस्थिति और कारावास की अवधि का लाभ उठाकर अधिकारियों द्वारा लक्ष्मी तालाब का बड़ा हिस्सा पाटकर कंक्रीटीकरण कर दिया गया। उनका कहना है कि यदि उन्हें झूठे मुकदमों में फँसाकर जेल न भेजा गया होता, तो आज लक्ष्मी तालाब की यह दुर्दशा नहीं होती।
नरेन्द्र कुशवाहा ने यह भी आरोप लगाया कि वास्तविक पर्यावरणीय मुद्दे से जनता का ध्यान भटकाने के लिए जानबूझकर मंदिरों और मजारों को अतिक्रमण बताकर साम्प्रदायिक माहौल बिगाड़ने की कोशिश की गई, ताकि लक्ष्मी तालाब में हो रहे अवैध निर्माण और पर्यावरणीय विनाश से ध्यान हटाया जा सके।
NGT के निर्देश और अगली कार्यवाही
वास्तविक स्थिति के निर्धारण हेतु NGT ने एक संयुक्त समिति गठित करने के आदेश दिए हैं, जिसमें केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB), सर्वे ऑफ इंडिया तथा पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEF&CC), लखनऊ के क्षेत्रीय कार्यालय के वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे।
MoEF&CC, लखनऊ के अधिकारी को समिति का नोडल अधिकारी बनाया गया है। समिति को निर्देश दिया गया है कि वह स्थल निरीक्षण कर पुराने राजस्व अभिलेखों के आधार पर लक्ष्मी तालाब की मूल सीमाओं एवं क्षेत्रफल का सत्यापन करे, तालाब तथा उसके जलागम/बफर क्षेत्र में हुए अतिक्रमण व निर्माण की पहचान करे और इसके लिए उत्तरदायी अधिकारियों/प्राधिकरणों को चिन्हित करे।
अधिकरण ने जिलाधिकारी एवं पुलिस अधीक्षक, झांसी को समिति को पूर्ण सहयोग देने के निर्देश दिए हैं। समिति को दो माह में जांच पूरी कर स्थिति रिपोर्ट NGT के समक्ष प्रस्तुत करनी होगी। मामले की अगली सुनवाई 13 अप्रैल 2026 को होगी।










