
- चीनी मिल अध्यक्ष ए. के. दीक्षित ने दी बड़ी खुशखबरी, प्रदेश में पहली बार मिली विशेष अनुमति
- उन्नत प्रजातियों की बुवाई पर जोर, अनुपयुक्त किस्मों को न उगाने की सख्त हिदायत
हरगाँव-सीतापुर। हरगाँव स्थित अवध शुगर एंड एनर्जी लिमिटेड के प्रांगण में मंगलवार को हलचल तेज रही। यहाँ गन्ना सुपरवाइजरों और प्रबंधकों की एक उच्च स्तरीय बैठक में किसानों के लिए बड़े फैसलों का एलान किया गया। बैठक की कमान संभाल रहे मिल के अधिशासी अध्यक्ष ए. के. दीक्षित ने एक क्रांतिकारी जानकारी साझा करते हुए बताया कि प्रदेश में पहली बार शासन ने गन्ना किसानों के हित में खड़े गन्ने के सर्वे की अनुमति दे दी है।
यह कदम उन किसानों के लिए वरदान साबित होगा जिनके पास आवंटित पर्चियों से अधिक गन्ना खेतों में खड़ा है। किसान अब अपने संबंधित गन्ना पर्यवेक्षक या मिल प्रबंधन से संपर्क कर सर्वे करा सकते हैं, जिसके आधार पर एडिशनल बॉन्ड के जरिए अतिरिक्त पर्चियाँ जारी की जाएंगी।
अधिशासी अध्यक्ष ने किसानों को आश्वस्त किया कि इस बार चीनी मिल की पेराई क्षमता में इजाफा किया गया है, जिससे गन्ने की आपूर्ति में कोई बाधा नहीं आएगी। उन्होंने अपील करते हुए कहा कि किसान अपने गन्ने को औने-पौने दामों में कोल्हू या क्रेशर पर न बेचें, बल्कि सीधे चीनी मिल को ही आपूर्ति करें। मिल को गन्ना देने से न केवल किसानों को सही मूल्य मिलेगा, बल्कि उनका बेसिक कोटा भी बढ़ेगा, जिसका सीधा लाभ उन्हें आने वाले सालों में पर्चियों के रूप में मिलेगा। उन्होंने साफ कहा कि मिल हर सुख-दुख में किसानों के कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी है।
आगामी बसंतकालीन बुवाई को लेकर भी मिल प्रबंधन ने अपनी रणनीति स्पष्ट कर दी है। किसानों को सलाह दी गई है कि वे केवल 118 और 15023 जैसी उन्नत और अधिक पैदावार वाली प्रजातियों का ही चुनाव करें। साथ ही, प्रबंधन ने सख्त चेतावनी दी है कि कलम गन्ना, 8436 और मिक्स 98014 जैसी रिजेक्टेड किस्मों की खरीद मिल कतई नहीं करेगी।
वैज्ञानिक तरीके से खेती की सीख देते हुए उन्होंने डीएपी की जगह एनपीके के प्रयोग और चार फीट की दूरी पर बुवाई करने की तकनीक सुझाई। इस मौके पर शरद सिंह और मनोज निर्वाल सहित मिल के तमाम वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे, जिन्होंने आधुनिक कृषि यंत्रों पर मिल रहे अनुदान का लाभ उठाने की भी अपील की।
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