
शिमला : हिमाचल प्रदेश में पिछले करीब तीन महीनों से जारी सूखी ठंड के बीच अब मौसम के बदलने के संकेत मिल रहे हैं और मौसम विभाग ने 16 से 20 जनवरी के बीच राज्य के कई हिस्सों में वर्षा और बर्फबारी का अनुमान जताया है। विभाग के अनुसार पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से खासतौर पर उच्च पर्वतीय और जनजातीय इलाकों में बर्फ गिर सकती है, जबकि मध्य व निचले पर्वतीय क्षेत्रों में हल्की से मध्यम बारिश के आसार हैं।
शिमला और मनाली जैसे प्रमुख हिल स्टेशनों में मौसम के पहले हिमपात को लेकर उम्मीद जगी है, जिससे पर्यटन कारोबार को भी राहत मिलने की संभावना है। हालांकि अगले 24 घंटे यानी 15 जनवरी को राज्य भर में मौसम साफ रहने का अनुमान है। लेकिन इसी दौरान मैदानी और निचले इलाकों में घने कोहरे और शीतलहर की चेतावनी भी जारी की गई है।
मौसम विभाग के मुताबिक ऊना में आज सुबह घना कोहरा दर्ज किया गया, जहां दृश्यता घटकर करीब 50 मीटर रह गई, जबकि पांवटा साहिब में हल्का कोहरा छाया रहा। राज्य में इस समय ‘सुखी ठंड’ का कहर जारी है और जनजातीय इलाकों में तापमान लगातार शून्य से नीचे बना हुआ है। बीती रात कुकुमसेरी में न्यूनतम तापमान माइनस 4.9 डिग्री और ताबो में माइनस 5.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
अन्य शहरों की बात करें तो शिमला में न्यूनतम तापमान 7.2, सुंदरनगर में 0.6, भुंतर में 0.9, कल्पा में 0.2, धर्मशाला में 3.6, ऊना में 2.4, नाहन में 6.5, पालमपुर में 2.0, सोलन में 0.5, मनाली में 1.9, कांगड़ा में 3.2, मंडी में 2.1, बिलासपुर में 3.5, हमीरपुर में 1.6, जुब्बड़हट्टी में 6.5, कुफरी में 6.3, नारकंडा में 3.8, रिकांगपिओ में 2.0, पांवटा साहिब में 10.0, सराहन में 4.0, देहरा गोपीपुर में 7.0, नेरी में 6.6, बजौरा में 1.5 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया।
मौसम विभाग के अनुसार बीती रात राज्य के औसत न्यूनतम तापमान में 0.2 डिग्री की बढ़ोतरी दर्ज की गई, लेकिन यह अब भी सामान्य से 0.6 डिग्री कम बना हुआ है। मैदानी और निचले इलाकों हमीरपुर, बिलासपुर, कांगड़ा, मंडी और ऊना में शीतलहर की स्थिति बनी हुई है और इन क्षेत्रों में कई बार तापमान शिमला जैसे हिल स्टेशन से भी कम दर्ज किया गया है।
लंबे समय से बारिश और बर्फबारी न होने के कारण राज्य में सूखे जैसे हालात बन गए हैं, जिसका सीधा असर फसलों और बागवानी पर पड़ा है। निचले इलाकों में रबी की मुख्य फसल गेहूं बारिश के अभाव में बर्बादी के कगार पर पहुंच गई है और अगर जल्द बारिश नहीं हुई तो किसानों की चिंता और बढ़ सकती है, वहीं सेब सहित अन्य फलों की फसल को भी पर्याप्त ‘चिलिंग आवर्स’ न मिलने से नुकसान की आशंका जताई जा रही है। ऐसे में 16 जनवरी से सक्रिय हो रहे पश्चिमी विक्षोभ से होने वाली संभावित बारिश और बर्फबारी को प्रदेश के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। इससे न केवल सूखे हालात से राहत मिलने की उम्मीद है बल्कि जल स्रोतों और कृषि को भी संजीवनी मिल सकती है।















