
नई दिल्ली। मुख्तार अंसारी के बड़े बेटे और मऊ सदर से सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के विधायक अब्बास अंसारी को सुप्रीम कोर्ट से महत्वपूर्ण कानूनी राहत मिली है। शीर्ष अदालत ने उत्तर प्रदेश गिरोहबंद अधिनियम (गैंगस्टर एक्ट) के एक मामले में पहले दी गई। अंतरिम जमानत को नियमित (रेगुलर) जमानत में बदल दिया है। यह फैसला चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत, जस्टिस जोयमलया बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की बेंच ने सुनाया।
सुप्रीम कोर्ट ने नोट किया कि मार्च 2025 में दी गई 6 सप्ताह की अंतरिम जमानत का अब्बास अंसारी ने कोई दुरुपयोग नहीं किया। ट्रायल चल रहा है और गवाहों की क्रॉस-एक्जामिनेशन जारी है। ऐसे में बिना मेरिट पर टिप्पणी किए अंतरिम जमानत को स्थायी कर दिया गया।
हालांकि, कोर्ट ने पहले लगाई गई सभी सख्त शर्तों को बरकरार रखा है, जिनका पालन अनिवार्य होगा। इनमें शामिल हैं – नियमित रूप से कोर्ट में हाजिरी, सबूतों से छेड़छाड़ न करना और अन्य शर्तें।
कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार, अब्बास अंसारी को यूपी से बाहर जाने की भी अनुमति मिल गई है, बशर्ते गैंगस्टर एक्ट की शर्तों का सख्ती से पालन हो।यह मामला जबरन वसूली और मारपीट जैसे आरोपों से जुड़ा है। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से अब्बास अंसारी की कानूनी स्थिति में बड़ी स्थिरता आई है।
हालांकि मुकदमे की सुनवाई जारी रहेगी। विधायक अब्बास अंसारी पिछले कुछ समय से विभिन्न मामलों में कानूनी लड़ाई लड़ रहे थे। यह राहत उनके समर्थकों के लिए बड़ी जीत मानी जा रही है।
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