
उज्जैन : डागर परिवार की बहू से जुड़े 2017 के तकिया मस्जिद हत्याकांड में कोर्ट ने फैसला सुनाया है। इस मामले में तीन आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा दी गई, जबकि एक आरोपी पहले ही जेल में मृत हो चुका है और एक अब भी फरार है।
घटना 9 मई 2017 की है, जब अनिल डागर के भाई बबलू उर्फ संतोष डागर को चारधाम मंदिर मार्ग, तकिया मस्जिद के सामने गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। बबलू के साथी गुरुचरण को भी बुरी तरह पीटा गया था। जांच में दिलीप कोरट, अमर सारसवाल, ओम सारसवाल, कालू सारसवाल और रोहित सरसवाल के नाम सामने आए थे। महाकाल पुलिस ने चार आरोपियों को गिरफ्तार किया था, जबकि रोहित अब तक फरार है।
पांच साल की सुनवाई के बाद पंचम अपर सत्र न्यायाधीश जितेन्द्र सिंह कुशवाह ने ओम, दिलीप और अमर को हत्या का दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। उपसंचालक (अभियोजन) डॉ. साकेत व्यास ने बताया कि शासन की ओर से पैरवी नितेश कृष्णन एडीपीओ द्वारा की गई।
जेल में कालू सरसवाल की मौत हो गई थी, जिस पर परिवार ने आरोप लगाया कि यह हत्या थी, लेकिन जेल प्रशासन ने हार्ट अटैक से मृत्यु होने की बात कही।
दोनों परिवारों के बीच दुश्मनी मार्च 2017 में तब शुरू हुई, जब अनिल डागर की पत्नी लापता हुई थी और डागर परिवार ने कालू सरसवाल के भाई पवन पर अपहरण का आरोप लगाया था। इसी रंजिश के चलते बबलू की हत्या की गई थी।











