
- रंपा महल पर कब्जे के दौरान टाउन हॉल में बढ़ी सियासी हलचल
सीतापुर : शहर में प्रशासन द्वारा आज जब रंपा महल को अपने कब्जे में लिया जा रहा था, तो इसकी सरगर्मी वहां से दूर टाउन हॉल में स्थित सपा कार्यालय में देखने को मिल रही थी। इस कब्जे की कार्रवाई ने जिले की सियासत को गरमा दिया है। नजूल भूमि पर बनी ऐतिहासिक इमारत रंपा महल को नोटिस दिए जाने के बाद कब्जेदारों ने मौके पर मौजूद तहसीलदार को स्वेच्छा से चाबियां सौंप दीं और महल को खाली कर दिया। यह कार्रवाई शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुई, लेकिन इसका असर तुरंत ही टाउन हॉल की ओर देखने को मिला, जो सपा (समाजवादी पार्टी) और कांग्रेस नेताओं के लिए राजनीतिक सरगर्मी का केंद्र बन गया।
टाउन हॉल बना राजनीतिक अखाड़ा
रंपा महल पर प्रशासन का कब्जा होते ही टाउन हॉल परिसर में अचानक राजनीतिक हलचल तेज हो गई। इस हलचल की शुरुआत तब हुई, जब सीतापुर सदर सांसद की दो गाड़ियां वहां जाते हुए देखी गईं। इतना ही नहीं, टाउन हॉल पर पहले से ही कई सपा नेताओं की मौजूदगी ने माहौल को और गर्मा दिया। सपा और कांग्रेस नेताओं के इस अचानक जमावड़े ने प्रशासन के अगले कदम को लेकर अटकलों का बाजार गर्म कर दिया है।
नोटिस के बाद टाउन हॉल में भी दबाव
गौरतलब है कि बीते शनिवार की शाम तहसील अधिकारियों की एक टीम ने टाउन हॉल का दौरा किया था। इस दौरान टीम ने वहां रह रहे लोगों को शीघ्र कब्जा छोड़ने का निर्देश दिया था। इस कार्रवाई में सपा कार्यालय में मौजूद लोग भी शामिल थे, जिस पर अब प्रशासन की तलवार लटकी हुई है।
रंपा महल पर हुई आज की कार्रवाई ने यह स्पष्ट कर दिया है कि नजूल भूमि पर कब्जा करने वालों के खिलाफ प्रशासन का रुख बेहद सख्त है और आने वाले दिनों में टाउन हॉल पर भी कार्रवाई की संभावना तेज हो गई है, जिससे विपक्षी दलों के नेताओं में बेचैनी बढ़ना स्वाभाविक है। यह घटनाक्रम सीतापुर में सरकारी संपत्तियों पर कब्जा हटाने की प्रशासन की मुहिम को दर्शाता है और इसके राजनीतिक निहितार्थ अब जोर पकड़ रहे हैं।











