
- अवैध कब्जेदारों पर बड़ी कार्रवाई, डीएम के निर्देश पर हॉल खाली
Sitapur : शहर के ऐतिहासिक रम्पा महल को लेकर जिला प्रशासन ने एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। प्रशासन ने आज इसे अपने कब्जे में ले लिया है।
तहसीलदार सदर अतुल सिंह ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि यह भवन नजूल भूमि पर बना हुआ था, जिस पर कुछ लोगों ने अवैध रूप से कब्जा कर रखा था। जिलाधिकारी के निर्देश पर नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी द्वारा 8 तारीख को अवैध कब्जा करने वालों को नोटिस जारी किया गया था, जिसमें उन्हें 15 दिन के भीतर स्वयं ही कब्जा हटाने का समय दिया गया था।
तहसीलदार ने बताया कि श्रीमती मनोरमा शुक्ला और उनके द्वारा अनौपचारिक रूप से अधिकृत किए गए व्यक्ति शकील इस हॉल पर अपना कब्जा बताते थे और इसे आवासीय व व्यावसायिक गतिविधियों के लिए किराए पर दे रहे थे। नोटिस जारी होने के बाद मनोरमा शुक्ला और शकील ने स्वेच्छा से हॉल को खाली कर दिया और चाबियां प्रशासन को सौंप दी हैं।
व्यापारियों को राहत, हॉल बनेगा लाइब्रेरी या म्यूजियम
कार्रवाई के दौरान यह पाया गया कि चांद नामक एक व्यक्ति, जो फ्रिज की दुकान चलाता है, ने हॉल के बाहर चैनल में थोड़ा सामान रखा था। उनसे बात करने के बाद उन्होंने भी स्वेच्छा से अपना सामान हटा लिया। तहसीलदार ने स्पष्ट किया कि रम्पा महल अब पूरी तरह से खाली हो चुका है और यह नजूल की संपत्ति है। इस पर किसी भी तरह का नया कब्जा दंडनीय अपराध माना जाएगा, जिसके लिए नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी और इस संबंध में एक बोर्ड भी लगाया जा रहा है।
उन्होंने उन सभी दुकानदारों और आवासीय गतिविधियों में लगे लोगों को राहत दी, जो हॉल के चारों ओर मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि जिलाधिकारी के निर्देशानुसार सिर्फ हॉल को ही प्रशासन ने अपने नियंत्रण में लिया है और बाकी व्यावसायिक या आवासीय गतिविधियों में लगे लोगों को जिला प्रशासन द्वारा नहीं हटाया जाएगा। इन लोगों की स्थिति को देखते हुए प्रशासन एक किराया मानक निर्धारित करेगा, जिसका पैसा सीधे नैमिषारण्य ट्रस्ट को जाएगा, और इस फंड का उपयोग नैमिषारण्य के विकास के लिए किया जाएगा। अंततः इस रम्पा महल को जिलाधिकारी द्वारा प्रस्ताव के माध्यम से लाइब्रेरी या म्यूजियम के रूप में विकसित किया जाएगा, जिससे सीतापुर की इस प्राचीन धरोहर को नया नाम और पहचान मिल सके।










