Lucknow : अपनी दुर्दशा पर रो रहा जरहरा गांव का ये तालाब !

  • आखिर कहां गया सौन्दर्यीकरण और संरक्षण का बजट?
  • प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के ठीक बगल में स्थित है ये गंदा तालाब

Lucknow : इंद्रानगर के जरहरा गांव स्थित तालाब का संरक्षण और सौन्दर्यीकरण कुछ इस तरह किया गया कि जनता को विकसित भारत का कॉन्सेप्ट समझ ही नहीं आ रहा है। बता दें कि 7 दिसंबर 2020 को प्रोजेक्ट का शिलान्यास किया गया था और शिलान्यास पत्थर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह समेत उन तमाम बड़े-बड़े नामचीन हस्तियों के नाम लिखे हैं जो विकसित भारत, स्वच्छ भारत के बड़े-बड़े दावे करते थे लेकिन जमीनी स्तर पर तस्वीरें कुछ अलग ही दिख रही हैं। आज ये तालाब अपनी दुर्दशा पर रो रहा है, मानो तालाब पूछ रहा हो कि आखिर मेरे संरक्षण और सौन्दर्यीकरण के लिए जो बजट आवंटित हुआ था वो कहां गया, क्यों मुझको इस दयनीय अवस्था में छोड़ दिया गया, क्यों मुझको अपने अस्तित्व के लिए रोजाना संघर्ष करना पड़ता है। तालाब ये भी सवाल करता है कि आखिर सौन्दर्यीकरण के नाम पर जब मेरी छाती खोदी जा रही थी तो मेरी छाती से निकली वो कीमती मिट्टी कहीं भ्रष्टाचार के भेंट तो नहीं चढ़ गई।

ये कुछ अहम सवाल हैं जो विकसित भारत की बड़ी-बड़ी बातें करने वालों की पोल खोलता हुआ नजर आ रहा है। जनता जो तालाब की आस में बैठी थी वो आज ठगा सा महसूस कर रही है। यह तालाब अब महज शराबियों, जुआरियों और स्मैकियों का अड्डा बन कर रह गया है। संचारी रोगों की रोकथाम के लिए बड़े-बड़े मास्टरप्लान तो बनाए जाते हैं लेकिन इन मास्टरप्लान के नाम पर महज औपचारिकता निभाई जाती है, आलम ये है कि तालाब जिसको विकास का प्रतीक होना चाहिए था वो आज बीमारियों भी अड्डा बन चुका है। तालाब के आसपास भीषण गंदगी का अंबार लगा हुआ है लेकिन जनता की समस्याओं की सुध लेने वाला कोई भी नहीं है। कभी भी कोई अप्रिय घटना भी हो सकती है क्योंकि सूरज ढलते ही यहां कुप्प अंधेरा हो जाता है और मार्ग-प्रकाश की कोई भी व्यवस्था नहीं है, आसपास जरहरा गांव में महिलाएं भी रहती हैं और मजबूरन उनको इस कुप्प अंधेरे में निकलना पड़ता है।

सबसे बड़ी लापरवाही तो ये हैं कि इस गंदे तालाब के ठीक बगल में जरहरा गांव व आसपास के क्षेत्र में लोगों को चिकित्सा सेवा मुहैया कराई जाती है, जी हां इस तालाब के ठीक बगल रानी अहिल्याबाई प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र उपस्थित है जो मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय के अंतर्गत आता है, लेकिन संबंधित विभाग यानी की नगर निगम ने स्वास्थ्य विभाग के इस पीएचसी को गंदगी से निजात नहीं दिला पाया, जिसकी वजह से जनता को रोजाना समस्याओं से दो-चार होना पड़ता है। कुल मिलाकर जनता को तो ठगा ही गया वहीं मिशन शक्ति के नाम पर महिलाओं को न तो सुरक्षा और न ही स्वच्छ स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हो पा रही हैं।

तालाब के हालातों पर दैनिक भास्कर ने जब स्थानीय लोगों से बात की तो उन्होंने क्या कुछ कहा. …

शिवा, स्थानीय – “ इस तालाब में गंदगी का अंबार लगा रहता है, कई बार शिकायत की गई लेकिन महज आश्वासन मिला, अंधेरे का फायदा उठाकर अराजक तत्वों ने इसको जुआ, शराब और स्मैक का अड्डा बना लिया है”

विशाल, स्थानीय – “ जबसे शिलान्यास हुआ है तब से ही स्थिति जस की तस है, गंदगी की वजह से बीमारियों का खतरा बना हुआ है। अंधेरा होते ही शराबियों का जमावड़ा लगने लगता है जो कि महिला सुरक्षा के बड़ा प्रश्नचिन्ह है, आप खुद ही देख सकते हैं कि जगह-जगह प्लास्टिक के ग्लास और शराब की बोलतें और पैकेट पड़े हुए हैं, लेकिन हमारी समस्याओं का सुध लेने वाला कोई भी नहीं है ”

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