कपसाड़ कांड : छावनी में तब्दील हुआ गांव, टोल प्लाजा पर पुलिस से भिड़े चंद्रशेखर

कपसाड़ कांड : मेरठ के सरधना क्षेत्र के कपसाड़ गांव में दलित महिला सुनीता की निर्मम हत्या और उनकी बेटी रुबी के अपहरण के बाद स्थिति लगातार विस्फोटक बनती जा रही है। जहां एक ओर पीड़ित परिवार बेटी की सलामती को लेकर बदहवास है, वहीं दूसरी ओर इस घटना ने प्रदेश की राजनीति को पूरी तरह गर्मा दिया है। गांव के बाहर टोल प्लाजा और चौराहे सियासी शक्ति प्रदर्शन और धरनों का केंद्र बन गए हैं।

पुलिस छावनी में तब्दील हुआ कपसाड़ गांव

प्रशासन ने किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए कपसाड़ गांव को पूरी तरह सुरक्षा घेरे में ले लिया है। गांव की सीमा से करीब ढाई किलोमीटर पहले ही बैरिकेडिंग कर दी गई है। एसएसपी, एसपी देहात, एसपी ट्रैफिक सहित चार सीओ मौके पर तैनात हैं। इसके अलावा 20 इंस्पेक्टर, 150 दरोगा और करीब 500 से अधिक पुलिसकर्मी ड्यूटी पर लगाए गए हैं। आरआरएफ और पीएसी की टीमें भी अलर्ट मोड में हैं। गांव का माहौल किसी छावनी से कम नहीं है।

पीड़ित परिवार से मिलने जा रहे नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद पुलिस की निगरानी को चकमा देकर कार्यकर्ताओं के साथ बाइक से सिवाया टोल प्लाजा तक पहुंच गए। जैसे ही पुलिस को इसकी जानकारी मिली, उन्हें वहीं रोक लिया गया। इस दौरान सांसद समर्थकों और पुलिस के बीच तीखी नोकझोंक हुई। कार्यकर्ताओं ने टोल प्लाजा पर ही धरना शुरू कर दिया। हालात बिगड़ते देख अधिकारियों ने पीड़ित परिवार से बातचीत कराने का आश्वासन दिया, जिसके बाद चंद्रशेखर को भारी सुरक्षा के बीच कंट्रोल रूम ले जाया गया।

इसी तरह, समाजवादी पार्टी के सांसद रामजीलाल सुमन को भी टोल से आगे नहीं बढ़ने दिया गया और उन्हें वापस लौटना पड़ा। इस कार्रवाई से नाराज सरधना विधायक अतुल प्रधान अपने समर्थकों के साथ धरने पर बैठ गए। विपक्षी नेताओं का आरोप है कि प्रशासन जानबूझकर उन्हें पीड़ित परिवार से मिलने से रोक रहा है।

लगातार बढ़ते तनाव के कारण गांव की गलियों में सन्नाटा पसरा हुआ है। ज्यादातर लोग अपने घरों में ही कैद हैं। बच्चों को बाहर निकलने से मना कर दिया गया है। ग्रामीण छतों से हालात पर नजर रख रहे हैं। गांव की सीमाएं सील होने के कारण नौकरीपेशा लोग भी बाहर नहीं जा सके, जिससे गांव का जनजीवन पूरी तरह ठप हो गया है।

पीड़ित परिवार का कहना है कि यदि 48 घंटे के भीतर अपहृत बेटी सुरक्षित वापस नहीं लाई गई, तो वे दोबारा बड़ा आंदोलन शुरू करेंगे। इस चेतावनी ने प्रशासन की चिंता और बढ़ा दी है। पुलिस टीमें लगातार दबिश देकर फरार आरोपियों और युवती की तलाश में जुटी हुई हैं।

AIMIM के मुजफ्फरनगर जिला अध्यक्ष इमरान काशमी जब कार्यकर्ताओं के साथ कपसाड़ जाने के लिए निकले, तो उन्हें सलावा चौराहे पर रोक लिया गया। इससे नाराज कार्यकर्ता सड़क पर ही धरने पर बैठ गए और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। इसी तरह, कश्यप एकता क्रांति मिशन के पदाधिकारी भी सलावा चौराहे पर धरने पर बैठ गए, जहां पुलिस से उनकी तीखी बहस हुई।

पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष सीमा प्रधान भी पीड़ित परिवार से मिलने सिवाया टोल प्लाजा पहुंचीं, लेकिन पुलिस ने उन्हें आगे नहीं जाने दिया। सीमा प्रधान ने पुलिस पर धक्का-मुक्की का आरोप लगाते हुए समर्थकों के साथ वहीं धरने पर बैठ गईं। इस दौरान माहौल और तनावपूर्ण हो गया।

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