
Greenland : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया बयानबाज़ी और धमकियों के बीच, ग्रीनलैंड ने अपने राजनीतिक एकता का मजबूत संदेश दिया है। ग्रीनलैंड की संसद के सभी पांच प्रमुख राजनीतिक दलों ने संयुक्त रूप से ट्रंप को कड़ा जवाब दिया है और स्पष्ट कर दिया कि ग्रीनलैंड का भविष्य केवल उसके निवासियों के हाथ में होगा।
संयुक्त बयान में सख्त शब्दों का इस्तेमाल
ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री जेन्स फ्रेडरिक नीलसन और विपक्षी दल नालेराक के नेता पेले ब्रोबर्ग समेत सभी प्रमुख दलों ने बयान जारी किया कि ग्रीनलैंड “अमेरिकन नहीं होगा, डेनिश नहीं होगा, हम ग्रीनलैंडवासी हैं।” उन्होंने अमेरिकी अधिग्रहण के किसी भी प्रयास को गंभीर रूप से असम्मानजनक बताया और कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानून और आत्मनिर्णय के अधिकार का पूरी तरह सम्मान होना चाहिए।
यह बयान विशेष रूप से इसलिए अहम माना जा रहा है क्योंकि विपक्षी दल नालेराक के नेता पेले ब्रोबर्ग पहले अमेरिका के साथ सीधे संबंध बनाने के पक्षधर रहे हैं। हाल ही में उन्होंने ग्रीनलैंड को डेनमार्क की भूमिका से अलग कर सीधे अमेरिकी संवाद की संभावना की ओर इशारा किया था। लेकिन अब सभी दलों की यह एकता और स्पष्ट रुख दिखाती है कि ग्रीनलैंड का भविष्य किसी बाहरी दबाव से प्रभावित नहीं होगा।
ट्रंप के बयान और प्रतिक्रियाओं का संदर्भ
ट्रंप ने हाल ही में न्यूयॉर्क टाइम्स को दिए इंटरव्यू में कहा था कि ग्रीनलैंड पर अमेरिकी स्वामित्व “सफलता के लिए मनोवैज्ञानिक रूप से आवश्यक” है। इसके साथ ही उन्होंने सैन्य बल के प्रयोग की संभावना से भी इनकार नहीं किया। इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में यह चिंता बनी थी कि अमेरिका ग्रीनलैंड पर दबाव बना सकता है।
ग्रीनलैंड की प्रतिक्रिया में यह स्पष्ट संदेश गया कि उनका रुख न केवल सख्त है बल्कि सभी राजनीतिक दलों में एकमत भी है। संसद ने जोर देकर कहा कि ग्रीनलैंड के निवासियों की इच्छा और अंतरराष्ट्रीय नियम सर्वोपरि हैं।
अंतरराष्ट्रीय ध्यान
इस घटना ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान खींचा है। विशेषज्ञों के अनुसार, ग्रीनलैंड का यह स्पष्ट रुख यह दर्शाता है कि छोटे देशों को भी अपने संसाधनों और रणनीतिक स्थान पर स्वतंत्र निर्णय लेने का अधिकार है। अमेरिका और डेनमार्क दोनों को अब यह स्पष्ट संदेश मिल गया है कि ग्रीनलैंड के लोग अपने भविष्य के निर्णय में पूरी तरह सक्रिय रहेंगे।















