सेवानिवृत्त बैंकर से 2.75 करोड़ की साइबर ठगी, 25 दिन रखा डिजिटल अरेस्ट

लखनऊ : साइबर ठगों ने 68 वर्षीय सेवानिवृत्त बैंकर को डिजिटल अरेस्ट कर 2.75 करोड़ रुपये की ठगी कर ली। ठगों ने खुद को ट्राई, पुलिस और कोर्ट का अधिकारी बताकर करीब 25 दिनों तक उन्हें डिजिटल अरेस्ट में रखा। 68 वर्षीय पीड़ित सिद्धार्थ नाथ ने विकास नगर थाने में प्रार्थना पत्र दिया है। पीड़ित ने साइबर क्राइम पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज कराई है। साइबर पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है।

पीड़ित का कहना है कि 30 अगस्त 2025 को उनके मोबाइल पर एक कॉल आई। कॉल करने वाले ने पूछा कि क्या उन्होंने मुंबई में एक सिम कार्ड खरीदा है। मना करने पर कहा गया कि उस सिम से गैरकानूनी गतिविधियां हो रही हैं और इसकी शिकायत ट्राई को मिली है। इसके बाद कॉल को दूसरे नंबर पर ट्रांसफर कर दिया गया, जहां आरोपी ने खुद को पुलिस अधिकारी बताया और कहा कि पीड़ित के आधार कार्ड से जुड़ा मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज है।

वीडियो कॉल के जरिए फर्जी कोर्ट की कार्यवाही दिखाई गई। पीड़ित को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कोर्ट में पेश होने का नाटक किया गया। फर्जी जज और वकीलों के जरिए बताया गया कि उन्हें सात दिन की डिजिटल रिमांड पर भेजा गया है और उनका फोन सर्विलांस पर है। ठगों ने कहा कि जांच के दौरान खाते में मौजूद रकम कोर्ट के आदेश पर सुरक्षित खातों में जमा करनी होगी।

डर के कारण पीड़ित ने अपनी एफडी और म्यूचुअल फंड तुड़वाकर अलग-अलग तारीखों में पीएनबी सहित कई बैंकों से 2.75 करोड़ रुपये विभिन्न कंपनियों और व्यक्तियों के खातों में ट्रांसफर कर दिए। बाद में जमानत के नाम पर 50 लाख रुपये की मांग की गई। 24 सितंबर को ठगों ने कहा कि कोर्ट जमानत देने को तैयार है, लेकिन इसके लिए 50 लाख रुपये और जमा करने होंगे। जब पीड़ित असमर्थ रहे तो आरोपियों ने कॉल उठाना बंद कर दिया। तब जाकर उन्हें ठगी का एहसास हुआ।

पीड़ित ने बताया कि इस ठगी में उनकी पत्नी की जमा पूंजी भी चली गई। यह रकम उनके और उनकी पत्नी की जीवन भर की कमाई थी।

थाना प्रभारी साइबर क्राइम बृजेश यादव ने बताया कि शिकायत के आधार पर जांच की जा रही है। जिन खातों में पैसा गया है, उन खातों की डिटेल निकाली जा रही है।

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