
वाराणसी : कई दंपतियों के लिए आईवीएफ शुरू करना भावनात्मक और आर्थिक तरह से बड़ा फैसला होता है। लेकिन परेशानी अक्सर इलाज से नहीं, बल्कि उन खर्चों से होती है जो साफ़ समझ नहीं आते, बार-बार बदलते रहते हैं या ठीक से समझाए नहीं जाते। कई लोग इलाज शुरू करते समय यह नहीं जानते कि अंत में कुल खर्च कितना आएगा। अलग-अलग क्लीनिकों में कीमतों का फर्क, दवाओं का खर्च और कुछ वैकल्पिक प्रक्रियाएँ बीच में जुड़ जाना यही उलझन की बड़ी वजह बनती है। डॉ. प्रगति भारती, फ़र्टिलिटी विशेषज्ञ, बिरला फर्टिलिटी एंड आईवीएफ, वाराणसी कहती हैं कि इसलिए खर्च की पारदर्शिता अच्छी और नैतिक फ़र्टिलिटी केयर का अहम हिस्सा होनी चाहिए।
फ़र्टिलिटी डॉक्टर की ज़िम्मेदारी केवल इलाज की दिशा बताने तक सीमित नहीं होती। यह भी ज़रूरी है कि पेशेंट्स समझें कि वे किस बात का भुगतान कर रहे हैं, क्यों कर रहे हैं और किन हालात में खर्च बदल सकता है। आईवीएफ कोई एक ही प्रक्रिया नहीं है, बल्कि कई चरणों की एक पूरी यात्रा है और हर चरण में स्पष्टता जरूरी होती है।
सबसे पहले समझिए: ‘साइकल लागत’ में क्या-क्या शामिल है
अक्सर पेशेंट्स को आईवीएफ साइकल के लिए एक कुल राशि बता दी जाती है, लेकिन हर क्लीनिक में उस राशि का मतलब अलग हो सकता है। एक साफ़ अनुमान में यह स्पष्ट लिखा होना चाहिए कि इसमें क्या शामिल है जैसे डॉक्टर की सलाह, अल्ट्रासाउंड, खून की जाँच, अंडा निकालने की प्रक्रिया, भ्रूण तैयार करना और भ्रूण स्थानांतरण। अगर इनमें से कोई सेवा शामिल नहीं है, तो उसका अलग खर्च साफ़ बताया जाना चाहिए।
यूके की रिसर्च में ज़्यादातर पेशेंट्स ने यही कहा कि उन्हें साफ़ और सही कीमत की जानकारी नहीं मिलने से असंतोष और भ्रम पैदा होता है। यह दिखाता है कि अस्पष्ट खर्च पेशेंट्स के लिए बड़ी परेशानी बन सकती है।
दवाओं के खर्च के बारे में शुरू में ही पूछ लें
आईवीएफ में दवाइयाँ कुल खर्च का बड़ा हिस्सा होती हैं यह कोई छोटा अतिरिक्त खर्च नहीं होता। कई देशों के आंकड़े बताते हैं कि सिर्फ़ दवाओं का खर्च ही कुल लागत का लगभग 20% तक हो सकता है। भारत में भी इंजेक्शन और हार्मोन दवाइयों का खर्च हज़ारों या कई बार दसियों हज़ार रुपये तक जा सकता है।
इसलिए पेशेंट्स को केवल न्यूनतम अनुमान नहीं, बल्कि वास्तविक संभावित रेंज पूछनी चाहिए। यह भी साफ़ कर लेना चाहिए कि दवाओं का भुगतान सीधे मेडिकल स्टोर को करना है या क्लीनिक के ज़रिए।
ऐड-ऑन प्रक्रियाओं को पहले ही समझ लें
कुछ अतिरिक्त प्रक्रियाएँ जैसे भ्रूण को फ्रीज़ करना, फ्रोज़न एम्ब्रियो ट्रांसफर, जेनेटिक जाँच या ब्लास्टोसिस्ट कल्चर हर पेशेंट के लिए ज़रूरी नहीं होतीं। यूके की एक संस्था की रिपोर्ट बताती है कि कई ऐड-ऑन सभी पेशेंट्स में समान लाभ नहीं देते।
इसलिए सवाल सिर्फ़ कीमत का नहीं होना चाहिए, बल्कि यह भी पूछना चाहिए कि मेरे केस में इसकी क्या ज़रूरत है।
अगर इलाज की योजना बदल जाए तो क्या होगा?
आईवीएफ हमेशा एक सीधी राह पर नहीं चलता। कभी साइकल रद्द हो सकता है, कभी भ्रूण को तुरंत ट्रांसफर की जगह फ्रीज़ करना पड़ सकता है, या बीच में नई जाँच की ज़रूरत आ सकती है। अच्छी पारदर्शिता का मतलब यह भी है कि रिफंड पॉलिसी, कैंसिलेशन चार्ज और स्टोरेज फीस जैसी बातें पहले से साफ़ बताई जाएँ इलाज के बीच में नहीं।
मौखिक भरोसे नहीं, लिखित अनुमान लें
सभी आर्थिक बातों को लिखित रूप में लेना सबसे सुरक्षित तरीका होता है। स्पष्ट इलाज योजना और अलग-अलग खर्च की सूची पेशेंट्स और क्लीनिक दोनों के लिए भरोसे की नींव बनाती है।
जब लागत स्पष्ट होता है, तो पेशेंट्स अपना ध्यान इलाज के फैसलों पर लगा पाते हैं, न कि अचानक आने वाले खर्चों की चिंता पर। यही स्पष्टता अपने आप में एक तरह की देखभाल है।














