
नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में लगभग 13 साल पहले हुए निर्भया कांड के बाद देर रात लोग निजी बसों में बैठने से कतराने लगे थे, लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता गया, तो फिर धीरे-धीरे करके लोगों का बसों में यात्रा को लेकर विश्वास बहाल होने लगा। इसी बीच दिल्ली में नया ‘बस गिरोह’ एक्टिव हो गया, जो देर रात बस अड्डों पर पहुंचकर सवारियों को बैठाता था। इस दौरान सवारियों को कम किराए में मंजिल तक पहुंचाने का झांसा दिया जाता। रात ज्यादा होने के चलते बस में इक्का-दुक्का सवारियां लेकर ही आरोपी बस को दौड़ा देते थे। इसके बाद जहा सन्नाटा मिलता था, तो बस चालक और दोनों कंडक्टर-हेल्पर सवारियों के साथ बदतमीजी शुरू कर देते। पुलिस ने मौके से 2 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। इसमें एक 41 साल का योगेश, 46 साल के अरशद और 28 साल का प्रेमशंकर शामिल है। गिरोह का सरगना योगेश है, जबकि अरशद और प्रेम शंकर कंडक्टर-हेल्पर का काम करते थे। दिल्ली पुलिस सूत्रों का कहना है कि आरोपी सिर्फ यात्रियों को लूटने के लिए किराए पर बस लेकर चला रहे थे। इस बस का किराया 1500 रुपये रोजाना था। इसके अलावा वह डेली यात्रियों से दो हजार रुपये तक लूट लेते थे। वह अक्सर यात्रियों को 30 रुपये में सेंट्रल या नॉर्थ दिल्ली पहुंचाने का झांसा देते थे। यह बस अक्सर आनंद विहार रेलवे स्टेशन और आईएसबीटी के पास से सवारियां उठाती थीं। फूलप्रूफ प्लानिंग के तहत लूट की वारदात को अंजाम देते थे।
दिल्ली पुलिस सूत्रों की मानें तो आनंद विहार आई आईएसबीटी से देर रात सस्ते किराए का झांसा देकर सवारियां उठाने के बाद जैसे ही आरोपी दिल्ली-मेरुत एक्सप्रेसवे पर पहुंचते थे। अपनी योजना के अनुसार यात्रियों से बदतमीजी शुरू कर देते, जो यात्री उनका विरोध करते उसके साथ मारपीट करते और अन्य यात्रियों से रुपये लूटकर उन्हें वहीं उतारकर फरार हो जाते। आरोपी जान-बूझकर देर रात या अलसुबह बस चलाते थे, ताकि पुलिस की नजरों से बचे रहें। कई पीड़ितों की शिकायतें मिलने के बाद पुलिस ने इन्हें पकड़ने की योजना बनाई थी। पुलिस का कहना है कि योगेश का आपराधिक इतिहास है, उसपर पहले से कई मुकदमे दर्ज हैं। बाकी आरोपियों की तलाश जारी है।















