स्पोर्ट्स गवर्नेंस कॉन्क्लेव में बोले खेल मंत्री मांडविया, ओलंपिक में टॉप-10 लक्ष्य से कोई समझौता नहीं

अहमदाबाद। केंद्रीय युवा कार्य एवं खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने शुक्रवार को यहां के वीर सावरकर स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में आयोजित ‘स्पोर्ट्स गवर्नेंस कॉन्क्लेव’ को संबोधित किया। यह सम्मेलन भारत सरकार द्वारा गुजरात सरकार और भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) के सहयोग से आयोजित किया गया था। सम्मेलन में राष्ट्रीय खेल महासंघों (एनएसएफ), राज्य ओलंपिक संघों और आईओए की कार्यकारिणी परिषद के सदस्य शामिल हुए।

डॉ. मांडविया ने भारत के खेल तंत्र के लिए सरकार की स्पष्ट और कठोर प्राथमिकताओं को रेखांकित किया। उन्होंने खेल प्रशासन में सुधार, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी अनुभव, जमीनी स्तर से लेकर शीर्ष स्तर तक प्रतिभा की पहचान और पोषण, कोचिंग प्रणाली को मजबूत करने तथा खेल अवसंरचना, अकादमियों और लीगों में निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने पर विशेष जोर दिया।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि पिछले डेढ़ वर्ष में सरकार ने भारतीय खेलों में सुधार के लिए एक मजबूत संस्थागत आधार तैयार किया है। उन्होंने राष्ट्रीय खेल प्रशासन अधिनियम (एनएसजीए), खेलो भारत नीति, अखिल भारतीय राष्ट्रीय खेल महासंघों के नियमों में सुधार और कोच भर्ती प्रणाली में बदलाव जैसे कदमों का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार ने हर फैसले को राजनीतिक इच्छाशक्ति और स्पष्ट उद्देश्य के साथ लागू किया है।

डॉ. मांडविया ने दो टूक शब्दों में कहा कि खेल महासंघों के भीतर लंबे समय से चले आ रहे मुद्दों—जैसे आंतरिक राजनीति, भ्रष्टाचार, पक्षपातपूर्ण चयन ट्रायल, खिलाड़ियों के साथ अन्याय, प्रशासनिक विवाद और वित्तीय अनियमितताएं—अब समाप्त होनी चाहिए। उन्होंने कहा, “हमारे लिए खिलाड़ी और देश की प्रतिष्ठा सर्वोपरि है।”

उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार खेल महासंघों की स्वायत्तता का सम्मान करती है, लेकिन इसके साथ ही सभी संस्थाओं को ईमानदारी, पारदर्शिता और खिलाड़ी-केंद्रित प्रशासन के प्रति प्रतिबद्धता दिखानी होगी। मंत्री ने कहा कि एनएसजीए का प्रभावी क्रियान्वयन महासंघों की जिम्मेदारी होगी, जिसमें समय पर और निष्पक्ष चुनाव, वित्तीय पारदर्शिता, सक्रिय खिलाड़ी आयोग, नैतिकता आयोग और निर्धारित प्रशासनिक मानकों का सख्ती से पालन शामिल है।

सम्मेलन में मंत्री ने सभी खेल महासंघों से अगले 1, 3, 5 और 10 वर्षों के लिए स्पष्ट रोडमैप तैयार करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि खेल संस्थाओं को पेशेवर तरीके से संचालित किया जाना चाहिए, जिसमें योग्य सीईओ, वित्तीय विशेषज्ञ, मार्केटिंग प्रोफेशनल्स, अंतरराष्ट्रीय स्तर के कोच और विशेष संचालन टीमें शामिल हों।

डॉ. मांडविया ने यह भी घोषणा की कि सरकार जल्द ही पारदर्शी और मानकीकृत चयन ट्रायल, “वन कॉर्पोरेट, वन स्पोर्ट” मॉडल और खिलाड़ियों के लिए बेहतर कल्याण पैकेज जैसी नीतिगत पहल शुरू करेगी। उन्होंने खेल विज्ञान, पोषण, चोट प्रबंधन और उच्च प्रदर्शन सहयोग में हो रहे बड़े सार्वजनिक निवेश का उल्लेख करते हुए महासंघों से सरकार की गति और महत्वाकांक्षा के साथ कदम मिलाने का आग्रह किया।

भारत के दीर्घकालिक खेल दृष्टिकोण को दोहराते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि ओलंपिक पदक तालिका में शीर्ष-10 में स्थान हासिल करना एक गैर-परक्राम्य राष्ट्रीय लक्ष्य है। उन्होंने जोर दिया कि इस लक्ष्य को हासिल करने में राष्ट्रीय खेल महासंघों और राज्य ओलंपिक संघों की भूमिका बेहद अहम होगी।

उन्होंने कहा, “एशियाई खेल 2026 से शुरुआत करते हुए हर बड़े अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में प्रदर्शन में निरंतर सुधार दिखना चाहिए। राष्ट्रमंडल खेल 2030 भारत के लिए एक ऐतिहासिक सफलता बनने चाहिए—चाहे मेजबान के रूप में हो या एक खेल महाशक्ति के तौर पर।”

अपने संबोधन के अंत में डॉ. मांडविया ने वर्तमान दौर को भारतीय खेलों का ‘स्वर्णिम काल’ बताते हुए सख्त संदेश दिया, “इतिहास याद रखेगा कि हमने इस दौर में क्या हासिल किया और जो हम नहीं कर पाए, उसके लिए हमें माफ नहीं करेगा।”

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