Sitapur : एक्शन के बाद रम्पा में म्यूजियम और लालकपड़ा कोठी में पुस्तकालय की राह खुली

  • टाउन हॉल के बाद अब लालकपड़ा कोठी, रम्पा महल और रानी कोठी पर एक्शन
  • कब्ज़ेदारों को 15 दिन का अल्टीमेटम, पालिका का सख्त रुख

Sitapur : नगर पालिका परिषद सीतापुर अब शहर की नजूल संपत्तियों को भूमाफियाओं के चंगुल से मुक्त कराने के लिए ऐतिहासिक अभियान पर निकल पड़ी है। टाउन हॉल के बाद अब शहर की तीन सबसे प्रतिष्ठित और करोड़ों की संपत्ति—रम्पा महल, रानी कोठी और लालकपड़ा कोठी—पर कुंडली मारे बैठे अवैध कब्ज़ेदारों को कड़े नोटिस जारी किए गए हैं, जिससे पूरे शहर में हड़कंप मच गया है।

​ ’15 दिन में खाली करो, वरना सब सरकारी’

अधिशासी अधिकारी (श्रेणी-1) द्वारा जारी इन नोटिसों में साफ़-साफ़ चेतावनी दी गई है कि कब्ज़ेदार नोटिस मिलने के 15 दिन की अवधि के भीतर इन संपत्तियों को खाली अवस्था में पालिका को सौंप दें। अगर ऐसा नहीं होता है, तो पालिका बिना किसी नरमी के सीधे कब्ज़ा हटाएगी और इसमें होने वाले खर्च की वसूली कब्ज़ेदारों से राजस्व बकाया के रूप में की जाएगी।

रानी कोठी और रम्पा महल में नगरपालिका ने श्रीमती मनोरमा शुक्ला (रम्पा महल) और श्रीमती ऋद्धिकी त्रिपाठी (रानी कोठी) समेत कई अनाधिकृत अभ्यासी को सीधे निशाने पर लिया है। पालिका ने स्पष्ट किया है कि ये नजूल भूखण्ड (सं. 33/4, 33/6 और 1568) उत्तर प्रदेश सरकार के नियंत्रण में पुनः प्रवेशित हो चुके हैं, जिसके बाद भी कब्ज़ा जारी रखना ‘अतिक्रमण’ की श्रेणी में आता है।
​लालकपड़ा कोठी पर कब्ज़ा जमाए बैठे लोगों को भी नोटिस थमाया गया है। खास बात यह है कि इस कार्रवाई से वर्षों से बंद पड़े पुस्तकालय (Library) के पुनः शुरू होने की उम्मीद जग गई है, जो ज्ञान और साहित्य प्रेमियों के लिए बड़ी राहत है।

​रम्पा महल में म्यूजियम, लालकपड़ा कोठी में लाइब्रेरी की तैयारी

​नगर पालिका की इस सख्त कार्रवाई के पीछे केवल कब्ज़ा हटाना ही नहीं, बल्कि इन ऐतिहासिक स्थलों को उनका पुराना गौरव लौटाना भी है। रम्पा महल में म्यूजियम की खबर है। यूपी स्टेट कंज़र्वेशन रिसर्च (UPSCR) ने रम्पा महल में एक संग्रहालय (Museum) स्थापित करने के लिए सर्वे कर अपनी रिपोर्ट भी मांगी है। यदि यह योजना सफल होती है, तो यह महल सीतापुर के इतिहास और संस्कृति को दर्शाने वाला एक प्रमुख केंद्र बन जाएगा।

लालकपड़ा कोठी में जल्द ही पुस्तकालय को पुनः संचालित करने की कवायद शुरू हो सकती है, जो छात्रों और आम जनता के लिए बेहद महत्वपूर्ण कदम होगा। यह कार्रवाई तब हुई जब दैनिक भास्कर द्वारा रम्पा महल और रानी कोठी को लेकर एक विशेष खबर प्रकाशित की गई थी। पालिका का एक दिन पहले टाउन हॉल और उसके तुरंत बाद इन तीन बड़ी संपत्तियों पर नोटिस जारी करना यह दर्शाता है कि प्रशासन नजूल भूमि को लेकर किसी भी दबाव में नहीं आने वाला है।

​ रम्पा महल – सीतापुर के गौरवशाली इतिहास का अनोखा पन्ना

इस ऐतिहासिक टॉकीज का निर्माण राजा सोमेश्वर दत्त शुक्ला ने अपनी रानी रम्पा देवी की याद में करवाया था। यह देश का एकमात्र ऐसा टॉकीज है, जिसकी छत अनूठी स्लैब (पत्थर की पटिया) से बनी है, जो इसे विशेष पहचान देती है।

ऐतिहासिक महत्त्व: रम्पा महल दशकों से सीतापुर की सांस्कृतिक और राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र रहा है। यहाँ कांग्रेस का एक अखिल भारतीय अधिवेशन हुआ था, जिसमें भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू भी शामिल हुए थे। महल में एक लाइब्रेरी भी थी।

खबरें और भी हैं...

अपना शहर चुनें