
Shikhar Dhawan on Bangladesh : बांग्लादेश में हिंदू समुदाय पर हो रही हिंसा और अत्याचारों का सिलसिला दिन-प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा है। इन घटनाओं ने देश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इसी बीच, भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व सलामी बल्लेबाज शिखर धवन ने सोशल मीडिया के माध्यम से इन घटनाओं पर अपनी चिंता व्यक्त की है।
शिखर धवन ने किया हिंसा का विरोध
शिखर धवन ने अपने एक्स अकाउंट पर लिखा, “बांग्लादेश में एक 44 वर्षीय हिंदू विधवा महिला के साथ हुई क्रूरता के बारे में पढ़कर दिल टूट गया। किसी के भी साथ, कहीं भी ऐसी हिंसा बर्दाश्त नहीं की जा सकती। पीड़ित के लिए न्याय और समर्थन की प्रार्थना।” उन्होंने इस घटना को बांग्लादेश में कानून व्यवस्था की कमी और अल्पसंख्यकों पर हो रहे अत्याचारों का प्रतीक बताया है। धवन ने भारतीय खिलाड़ियों और समर्थकों से भी इन अत्याचारों के खिलाफ आवाज उठाने और न्याय की मांग करने की अपील की है।
बांग्लादेश में हिंदू समुदाय के खिलाफ हिंसा की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। हाल ही में हुई एक घटना में, 44 वर्षीय विधवा महिला के साथ गैंगरेप के बाद उसकी क्रूरता का खुलासा हुआ है। कथित तौर पर, दो पुरुषों ने महिला के साथ बलात्कार किया, फिर उसे पेड़ से बांधकर उसके बाल काट दिए। इस जघन्य घटना ने देश में कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।
कब-कब हुई हिंसा
बांग्लादेश में हाल के दिनों में हिंसक प्रदर्शन और हमले तेज हो गए हैं। इन घटनाओं का संबंध सिंगापुर में जुलाई विद्रोह के आयोजक शरीफ उस्मान हादी की मौत से जुड़े विरोध प्रदर्शनों से माना जा रहा है।
- 6 जनवरी, 2026 को, भंडरपुर गांव के रहने वाले 25 वर्षीय हिंदू युवक मिथुन सरकार भीड़ से बचने के लिए नहर में कूद गया, लेकिन भीड़ ने उस पर चोरी का आरोप लगाकर हमला किया। उसकी मौत हो गई।
- 5 जनवरी, 2026 को, जशोर जिले में हिंदू व्यवसायी राणा प्रताप बैरागी की गोली मारकर हत्या कर दी गई।
- उसी दिन, 40 वर्षीय हिंदू किराना दुकानदार शरत मणि चक्रवर्ती भी हत्या का शिकार बने।
इन घटनाओं के अलावा, एक भयावह घटना में, 44 वर्षीय हिंदू महिला के साथ कथित तौर पर दो पुरुषों ने गैंगरेप किया और फिर उसके बाल काट दिए। यह घटना पूरे देश में भय और आक्रोश का माहौल बना रही है।
बांग्लादेश में हिंदुओं के साथ हो रही इन घटनाओं ने देश में असुरक्षा की भावना को जन्म दिया है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि सरकार और कानून व्यवस्था इन अत्याचारों को रोकने में असमर्थ साबित हो रही है। इन घटनाओं ने देश के सामाजिक ताने-बाने को भी प्रभावित किया है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिंता जताई जा रही है।
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