पहले ही मिल गई थी इंदौर में दूषित पानी की चेतावनी, दो साल पहले भाजपा पार्षद ने नगर निगम से की थी शिकायत

MP : मध्य प्रदेश के इंदौर में दूषित पानी पीने से 15 लोगों की मौत के बाद एक नया खुलासा हुआ है, जिसने इस मामले को और भी गंभीर बना दिया है। भाजपा के वार्ड 11 के पार्षद कमल वाघेला ने दो साल पहले ही अपने वार्ड में मौजूद जर्जर और पुरानी पेयजल पाइपलाइनों को बदलने का आवश्यक कदम उठाने का आग्रह नगर निगम अधिकारियों से किया था।

हालांकि, उनके इस अनुरोध को नगर निगम ने नजरअंदाज किया और अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की है।

भाजपा पार्षद कमल वाघेला ने जुलाई 2022 में वार्ड 11 के भागीरथपुरा क्षेत्र में पेयजल समस्या का पता लगाने के बाद, तत्कालीन नगर निगम अधिकारियों को पत्र लिखा था। उन्होंने इसमें जर्जर पाइपलाइनों को बदलने और नई पाइपलाइन बिछाने का आग्रह किया। इसके बावजूद, इस मामले में कोई त्वरित कदम नहीं उठाया गया।

शुक्रवार, 2 जनवरी को वाघेला ने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव को पत्र लिखा। उन्होंने आरोप लगाया कि जल पाइपलाइन बदलने का उनका अनुरोध अधिकारियों द्वारा लगातार अनदेखा किया गया। वाघेला ने बताया कि वे 2023 से ही भागीरथपुरा में पेयजल की गुणवत्ता को लेकर आशंका जता रहे थे और मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर भी शिकायत दर्ज कराई थी।

उन्होंने कहा, “मैंने भागीरथपुरा में नई पाइपलाइन बिछाने की मांग की थी। मेरी इस मांग पर 12 नवंबर, 2024 को एक आधिकारिक फाइल बनाई गई थी, लेकिन इसे सात महीने तक रोक कर रखा गया।”

वाघेला ने आरोप लगाया कि महापौर पुष्यमित्र भार्गव से संपर्क करने के बाद, 30 जुलाई, 2025 को निविदा प्रक्रिया शुरू की गई। उन्होंने कहा कि निविदा पूरी करने का कार्य निर्धारित समय में पूरा नहीं हुआ, और यह प्रक्रिया लटकती चली गई।

वार्ड 11 में लगभग 40 प्रतिशत पाइपलाइनें पुरानी हैं और उनके बदलने के लिए लगभग 23 लाख रुपये की आवश्यकता है। इस पूरे प्रकरण ने स्थानीय स्तर पर चिंता और आक्रोश को जन्म दिया है।

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