Gonda : धान क्रय केंद्र बने दिखावा, किसान लगा रहे चक्कर

  • 1500 रुपये में धान बेचने को मजबूर किसान

Gonda : जिले में 92 धान क्रय केंद्र स्थापित किए गए हैं, लेकिन एक माह बीत जाने के बाद भी ज्यादातर केंद्रों पर सीधे खरीद शुरू नहीं हो सकी है। इसका नतीजा यह है कि हजारों किसान मजबूरी में अपना धान मात्र 1500 रुपये प्रति क्विंटल में बेचने को विवश हैं। ऐसे हालात में किसानों की आय दोगुनी होने का सपना अधूरा ही दिख रहा है, जबकि इस बार जिले में धान का अच्छा उत्पादन हुआ है।

गोंडा में सहकारी समितियों, पीसीयू, संघ, भारतीय खाद्य निगम सहित दर्जनों एजेंसियों को सरकारी दर पर धान खरीदने की जिम्मेदारी दी गई है, लेकिन बेमौसम बारिश के कारण बाजार में धान का भाव गिर गया। इसी वजह से सरकारी एजेंसियों ने खरीदारी से किनारा कर लिया। परिणामस्वरूप धान की खरीद व्यापारी और बिचौलियों के हाथों तक सीमित होकर रह गई।

जानकारी के मुताबिक, जिन किसानों का धान सरकारी दर पर खरीदा जा रहा है, वे अधिकतर वीआईपी कोटे के किसान हैं। आम किसानों से धान खरीदने के लिए एजेंसियाँ आगे नहीं आ रहीं, और न ही स्पष्ट रूप से मना कर रही हैं। ऐसे में किसान दोराहे पर खड़े हैं—बाजार में औने-पौने दाम पर बेचें या क्रय केंद्रों के चक्कर लगाते रहें।

पूर्व विधायक बैजनाथ दुबे ने बताया कि उन्होंने अपना धान झौहना केंद्र पर बेचा था, लेकिन दो सप्ताह बीत जाने के बाद भी भुगतान नहीं मिला। सचिव का कहना है कि भुगतान मशीन खराब है।

आरएफसी चंद्रभान यादव ने बताया कि अब तक 3,519 किसानों से धान की खरीद की जा चुकी है और 48 घंटे के भीतर भुगतान भेजा जा रहा है।

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