गोंडा : बिना साबुन-तेल के रह रहीं कस्तूरबा बालिका स्कूल की छात्राएं

  • छह माह से नहीं हुई निविदा भोजन की भी नहीं हुई निविदा

गोंडा। बेटी पढ़ाओ बेटी बचाओ अभियान के तहत जिले में चल रहे 17 कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में छह माह से साबुन व तेल स्टेशनरी की आपूर्ति नहीं पायी. कारण निविदा प्रक्रिया में चल रही है। इसी तरह भोजन व्यवस्था के लिए नई निविदा नहीं हो पायी, पुराने ठेकेदार से आपूर्ति पुराने दर पर लिया जा रहा है। यह शिक्षा विभाग के अति महात्वाकाक्षी कस्तुरबा गांधी विदयालयों की है जिसमें समाज की अति गरीब बालिकायें पढ रही है। हर ब्लाक में एक कस्तुरबा गांधी बालिका विद्यालय की स्थापना गरीब बालिकाओं के शिक्षण य रहने के लिए की गयी। आवासीय व्यवस्था होने से नाश्ता, दोपहर भोजन व शाम को भोजन दिया जाता है. नहाने के लिए तेल साबून व लिखने के लिए स्टेशनरी दी जाती है कापी किताब, बैग, जूता ड्रेस मुहैया कराया जाता है।

नये शिक्षा सत्र से यहा की व्यवस्था बेटरी हो गयी, कारण नवबर 24 से स्टेशनरी आपूर्ति की निविदा नहीं हो पायी। इससे मूल जरूरत की सामग्री मुहैया कराना कठिन हो गया। इसके साथ सुबह-शाम नाश्ता व भोजन की व्यवस्था शामिल है लेकिन इसका भी निविदा नहीं हो पायी है। पुरानी संस्था कार्य कर रही है। कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय रूपईडीह, कटराबाजार, हलधर मऊ , कर्नलगंज, परसपुर, बेलसर, तरबगंज, वजीरगंज, नबाबगंज, मनकापुर, छपिया, बभनजोत, मुजेहना, इटियाथोक, पडरीकृपाल, झझरी व वनग्राम महेशपुर में ये विदयालय चल रहे हैं। इसके अलावा इन बालिकाओं को आठवीं के बाद उच्च शिक्षा के लिए पांच विदयालय उच्चीकृत किये गये, इनमें झंझरी, वजीरगंज, कटराबाजार, बभनजोत, हलधरमउ शामिल है, यहां पर नवीं व दसवीं कक्षाएं संचालित हो रही हैं। इन बालिकाओं के स्वास्थ्य शिक्षा व सुरक्षा पर पूरा ध्यान दिया जाए, यह विभाग व शासन की मंशा है।

क्या कहती हैं जिला समन्वयक बालिका शिक्षा

गोंडा, जिला समन्वयक बालिका शिक्षा रक्क्षदा सिंह का कहना है कि दोनों निविदायें फाइनल स्टेज में है। जल्द ही नयी फर्मा सामानों की आपूर्ति शुरू कर देगी, इससे पहले पुरानी संस्था सामानों की आपूर्ति कर रही है।

यह भी पढ़ें: Haryana : हरियाणा विधान सचिवालय सेवा नियम 1981 में होगा संशोधन

खबरें और भी हैं...

अपना शहर चुनें