
भोपाल : मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने एक बार फिर अपने बयान से सुर्खियां बटोरी हैं। हाल ही में दिए साक्षात्कार में उन्होंने सेवानिवृत्ति की उम्र को लेकर चल रही बहस पर अपनी राय दी और यह संकेत दिया कि वे भविष्य में चुनाव लड़ सकती हैं। उमा भारती ने कहा कि उनकी उम्र अभी 65 वर्ष से अधिक नहीं हुई, लेकिन चुनाव तब ही लड़ूंगी जब मुझे लगेगा कि मैं इसके लिए पूरी तरह तैयार हूं।
योगदान की उम्र तय नहीं होती
उमा भारती ने कहा कि कोई भी संगठन, राजनीतिक दल या संस्था सेवानिवृत्ति की उम्र तय कर सकता है, लेकिन राजनीति में योगदान की उम्र तय नहीं की जा सकती। उनके अनुसार राजनीति ऐसा मंच है जहां योगदान देने की क्षमता ही असली पहचान होती है।
प्रतिबद्धता के प्रति ईमानदार
उन्होंने स्पष्ट किया कि इस समय चुनाव लड़ना उनके लिए एक बाधा होगी। उन्होंने कहा कि अगर वे संसदीय चुनाव लड़ती हैं, तो जनता की सेवा और समस्याओं को हल करना उनकी जिम्मेदारी होगी। वहीं, यदि मंत्री बनती हैं तो अलग जिम्मेदारी निभानी पड़ेगी। उमा भारती ने कहा, “मैं अपनी प्रतिबद्धता के प्रति बहुत ईमानदार हूं। अगर मैं सांसद बन गई तो अपना पूरा समय जनता को दूंगी। अगर वे परेशान हुए तो मैं खुद को दोषी मानूंगी।”
सत्ता के लिए किसी वस्तु की आवश्यकता नहीं
उमा भारती ने खुद को आत्मनिर्भर और जनता की शक्ति से संपन्न बताया। उन्होंने कहा कि उनके पास स्पष्ट लक्ष्य और दृढ़ संकल्प है। चुनाव लड़ने का निर्णय इस बात पर निर्भर करेगा कि क्या इससे उनके लक्ष्यों की पूर्ति होगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि सत्ता पाने के लिए उन्हें किसी वस्तु की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि जनता ने उन्हें हिम्मत और समर्थन दिया है, जो उनके लिए हमेशा मददगार साबित हुआ है।