3 नए क्रिमिनल कानूनों पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने तीन नए आपराधिक कानूनों—भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम को चुनौती देने वाली याचिकाओं को अपने पास स्थानांतरित करने से इनकार कर दिया है। अदालत ने मद्रास हाईकोर्ट को निर्देश दिया कि वह इन याचिकाओं पर प्राथमिकता के आधार पर सुनवाई करे।

जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की पीठ ने यह आदेश फेडरेशन ऑफ बार एसोसिएशंस ऑफ तमिलनाडु एवं पुडुचेरी की याचिका पर दिया। एसोसिएशन ने मांग की थी कि इन कानूनों को चुनौती देने वाली लंबित याचिकाओं को सुप्रीम कोर्ट में ट्रांसफर किया जाए।

पीठ ने कहा कि यह मामला संवैधानिक वैधता से जुड़ा है और बेहतर होगा कि पहले हाईकोर्ट की राय सामने आए। अदालत ने मद्रास हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से अपील की है कि मामले को डिवीजन बेंच के समक्ष सूचीबद्ध कर शीघ्र सुनवाई कराई जाए।

सुप्रीम कोर्ट को बताया गया कि हाईकोर्ट ने सितंबर 2024 में नोटिस जारी किया था और जुलाई 2025 में मामले को सूचीबद्ध किया, लेकिन अब तक सुनवाई की तारीख तय नहीं की गई है। याचिकाकर्ताओं ने दलील दी थी कि इसी विषय पर सुप्रीम कोर्ट में अन्य याचिकाएं पहले से लंबित हैं, इसलिए सभी को एक साथ सुना जाए।

गौरतलब है कि मद्रास हाईकोर्ट ने पिछले वर्ष टिप्पणी की थी कि नए आपराधिक कानूनों के नामकरण से भ्रम की स्थिति पैदा हुई है, हालांकि इनका उद्देश्य सकारात्मक रहा है।

खबरें और भी हैं...

अपना शहर चुनें