दागी नेताओं पर सियासी संग्राम: नीतीश-नायडू को लेकर संजय राउत का बड़ा दावा

नई दिल्ली: दागी प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को हटाने से जुड़े विधेयक को लेकर अब सियासत गरमा गई है। शिवसेना यूबीटी के वरिष्ठ सांसद संजय राउत ने केंद्र सरकार पर बड़ा आरोप लगाते हुए कहा है कि यह बिल सीधे-सीधे बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और आंध्र प्रदेश के सीएम चंद्रबाबू नायडू को साधने के लिए लाया गया है।

राउत का दावा है कि मोदी सरकार को इस बात का डर है कि नीतीश और नायडू कभी भी एनडीए का समर्थन वापस ले सकते हैं, और इसी आशंका को देखते हुए सरकार ने ये तीनों विधेयक संसद में पेश किए।

राउत का आरोप – नीतीश-नायडू डरे हुए

संजय राउत ने अपने एक्स पूर्व ट्विटर पोस्ट में लिखा–
मोदी-शाह ने संसद में मुख्यमंत्रियों और मंत्रियों को गिरफ्तार कर बर्खास्त करने वाला बिल पेश किया है। बताया जा रहा है कि नायडू और नीतीश सबसे ज्यादा डरे हुए हैं। मोदी सरकार को डर है कि वे समर्थन वापस ले सकते हैं।
अमित शाह ने रखा बिल, विपक्ष का हंगामा

गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में दागी पीएम-सीएम को हटाने से जुड़े तीन विधेयक पेश किए।

प्रावधान है कि प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, केंद्रीय या राज्य मंत्री अगर किसी गंभीर आपराधिक मामले में गिरफ्तार होते हैं और 30 दिन से ज्यादा हिरासत में रहते हैं, तो उन्हें पद छोड़ना होगा।

ये बिल जोरदार हंगामे के बीच पेश हुए और अब इन्हें संयुक्त संसदीय समिति JPC के पास भेजा गया है।

समिति में 21 सदस्य लोकसभा स्पीकर नामित करेंगे और 10 सदस्य राज्यसभा के उपसभापति।

विपक्ष का विरोध, लेकिन कुछ समर्थन भी

विपक्षी दलों ने इन विधेयकों को संविधान विरोधी और लोकतंत्र विरोधी बताया है। उनका आरोप है कि सरकार इस कानून का इस्तेमाल विपक्षी नेताओं को डराने और चुनी हुई सरकारों को अस्थिर करने के लिए करेगी।

हालांकि, विपक्ष के भीतर भी मतभेद हैं। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने इस तरह के कानूनों का समर्थन करते हुए कहा कि अगर कोई नेता गंभीर अपराध में दोषी पाया जाता है, तो उसे पद पर बने रहने का हक नहीं होना चाहिए।

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