
सतरिख, बाराबंकी : हरख ब्लॉक के बंदगीपुर मजरे बड़ापुरा गांव में एक छात्रा के जन्म प्रमाण पत्र को लेकर प्रशासनिक लापरवाही और कागज़ी हेरफेर का मामला सामने आया है। सीएचसी शुरू होने से पहले छात्रा का जन्म वहीं बताया गया है, जिसे लेकर पंचायत सचिव की जांच रिपोर्ट पर सवाल उठ रहे हैं।
गांव निवासी लालजी ने अपनी पुत्री आरती देवी का जन्म प्रमाण पत्र बनवाने के लिए 21 मई 2025 को उपजिलाधिकारी नवाबगंज को आवेदन दिया था। एसडीएम ने तत्काल खंड विकास अधिकारी हरख को जांच कर नियमानुसार आख्या भेजने का निर्देश दिया।
बीडीओ ने पंचायत सचिव नवीन मित्तल को जांच सौंप दी, लेकिन ढाई माह बाद भी कार्रवाई ठोस रूप में आगे नहीं बढ़ सकी। हाल ही में दी गई रिपोर्ट में सचिव ने छात्रा का जन्म 21 फरवरी 2008 को सतरिख सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सीएचसी में होना बताया है।
जबकि हकीकत यह है कि सीएचसी का शिलान्यास 2006 में हुआ था और संचालन 2011 में शुरू हुआ। ऐसे में यह सवाल उठना लाज़िमी है कि संचालन से तीन साल पहले सीएचसी में प्रसव कैसे संभव हो सकता है?
इस विरोधाभास पर बीडीओ प्रीति वर्मा का कहना है कि सचिव की जांच रिपोर्ट में छात्रा का जन्म सीएचसी में दर्शाया गया है, जबकि यह तकनीकी रूप से असंभव प्रतीत हो रहा है।
आवेदक लालजी लगातार अफसरों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन अभी तक प्रमाण पत्र जारी नहीं हो सका है। ब्लॉक कार्यालय में प्रक्रिया की जटिलता और लापरवाही के चलते अब छात्रा को शिक्षा व अन्य दस्तावेज़ों में परेशानी उठानी पड़ सकती है।
डीपीआरओ नितेश भोंडेले ने कहा है कि मामले की जांच कराई जाएगी। यदि लापरवाही या दस्तावेज़ों में गड़बड़ी पाई जाती है, तो पंचायत सचिव के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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