
मध्य प्रदेश के टमाटर उत्पादक किसान एक बार फिर गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। टमाटर की कीमतें खेत में 3 से 4 रुपये प्रति किलो तक गिर चुकी हैं, जिससे किसान लागत भी नहीं निकाल पा रहे। हालत इतनी बदतर हो गई है कि कई किसानों ने फसलों की सिंचाई बंद कर दी है, और पकी हुई उपज को या तो सड़ा दिया है या मवेशियों को खिला दिया है।
किसानों के दर्द की आवाज़ बने जीतू पटवारी
कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने इस स्थिति को लेकर सरकार पर कड़ा हमला बोला है। उन्होंने कहा, “यह हालात किसी प्राकृतिक आपदा के कारण नहीं, बल्कि सरकार की नीतिगत विफलता और उदासीनता का नतीजा हैं। छतरपुर के किसान भले ही जीवित हैं, पर उनकी उम्मीदें मर चुकी हैं।”
पटवारी ने किसानों को देश का अन्नदाता बताते हुए कहा कि उन्हें याचक की तरह देखने का नजरिया अन्यायपूर्ण है। उन्होंने सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।
किसानों की समस्या प्रदेशव्यापी, समाधान नहीं
जीतू पटवारी ने कहा कि यह संकट सिर्फ छतरपुर या किसी एक ज़िले का नहीं है, बल्कि यह प्रदेशव्यापी संकट है। उन्होंने बताया कि टीकमगढ़, पन्ना, निवाड़ी, दमोह, रतलाम, मंदसौर, धार जैसे जिलों में हर साल हजारों किसान टमाटर उगाते हैं, लेकिन हर बार उन्हें उचित मूल्य नहीं मिल पाता।
राज्य में न तो प्रोसेसिंग यूनिट्स हैं, न ही कोल्ड स्टोरेज। किसान अपनी उपज को या तो औने-पौने दामों पर बेचने को मजबूर होते हैं या फिर बर्बाद कर देते हैं। ऐसे हालात में खेती करना घाटे का सौदा बन गया है।












