भ्रष्टाचार : भूसा सस्ता है, अधिकारी कह रहें मंहगा खरीदो, जिस फर्म को मिला टेंडर उसके पास नहीं भंडारण गृह

  • अब तो पंचायत सचिवों ने ही खोल दी जीरो टॉलरेंस की हकीकत
  • भ्रष्टाचार : भूसा सस्ता मिल रहा है अधिकारी कह रहे मंहगा खरीदो
  • 939 रुपये प्रति कुंतल भूसा खरीदने का सचिवों पर दबाव
  • जिस फर्म को टेंडर दिया उसके पास भंडारण गृह भी नहीं
  • उत्पीडऩ से त्रस्त सचिव आज विकास भवन में देंगे धरना

भास्कर ब्यूरो

कानपुर देहात। जिले में भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है। अफसरों के शोषण से आजिज पंचायत सचिवों ने धरने का ऐलान कर दिया है। शुक्रवार को इस बावत डीएम को पत्र सौंपा। शनिवार को विकास भवन के बाहर धरना होगा। आरोप हैं सीडीओ और डीपीआरओ अपने स्वार्थों की पूर्ति के लिए मनमाने तरीके से कलस्टर आवंटित करते हैं। अपने चहेते लोगों को कलस्टर आवंटन नहीं किया जाता है। गौवंश आश्रय स्थलों के लिए भूसा खरीदने में चहेती फर्म से खरीद का दबाव बनाया जा रहा है। फर्म जिस रेट पर भूसा दे रही है उससे कम दामों में भूसा मिल रहा है।

अफसरशाही के विरोध में पंचायत सचिव बगावत पर उतर आए हैं। अफसरों के मनमाने आदेश न मानने का फैसला किया है। जिला पंचायत अधिकारी संघ व ग्राम विकास अधिकारी एसोसिएशन समन्वय समिति के अध्यक्ष अनुराग त्रिवेदी और महामंत्री अशीष कुमार मिश्रा ने बताया कि झूठी शिकायतों पर बिना पक्ष सुने पंचायत सचिवों को निलंबित किया जा रहा है। गांवों में बनाए गए गौवंश आश्रय स्थलों के लिए एक ही फर्म से भूसा और दाना खरीद के लिए दबाव बनाया जा रहा है। जिस फर्म को भूसा आपूर्ति का टेंडर दिया गया है उस फर्म का जिले में न तो कोई भंडार गृह है और न ही फर्म इस जिले की है। भूसा खरीद की निर्धारित की गई दरें 939 रुपये प्रति कुंतल है जबकि किसान इससे काफी कम दामों में भूसा बेच रहे हैं। पंचायत सचिव निर्धारित फर्म से भूसा नहीं खरीद रहे हैं तो अफसर नाराज हैं। पंचायत सचिवों की मीटिंग बुलाकर उन्हें धमकाया जा रहा है। इस बावत जब डीपीआरओ का पक्ष जानने के लिए काल की गई लेकिन उन्होंने रिसीव नहीं किया।

शासन से अच्छी रैंकिंग के लिए फर्जी रिपोर्टिंग

पंचायत सचिवों ने अफसरों पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। पत्र में लिखा है कि शासन से अच्छी रैंकिंग प्राप्त करने के लिए अफसर फर्जी रिपोर्टिंग करने का दबाव बना रहे हैं। ताकि शासन को फर्जी रिपोर्ट भेजकर कॉलर ऊंचा किया जा सके। फर्जी रिपोर्टिंग न करने वाले पंचायत सचिवों को परेशान किया जाता है।

एकाउटेंट की वसूली से आक्रोश
जिला पंचायत के एकाउंटेंट अनुरूद्ध कुमार पर आरोप है कि जीएसटी और टीडीएस कटौती के नाम पर जबरन धन उगाही कर रहे हैं। जिसकी जानकारी जिला पंचायत राज अधिकारी को भी है। इसके बाद भी उन पर अंकुश नहीं लगाया जा रहा है। सचिवों का कहना है कि जिन पंचायतों में सामग्री आपूर्ति की जाती उसका टेंडर होता है। ढाई लाख से अधिक की आपूर्ति पर दो प्रतिशत टीडीएस काटे जाने का प्रावधान है। इसके बाद भी सचिवों का उत्पीडऩ किया जा रहा है।

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