
शाहाबाद, हरदोई। मां कात्यायनी शक्तिपीठ शाहाबाद में आयोजित चैत्र नवरात्रि महोत्सव के अंतर्गत सातवें दिवस की कथा में आचार्य अनंत शरण ने शिव पार्वती विवाह के अवसर पर गृहस्थ आश्रम के महात्म पर प्रकाश डालते हुए कहा कि शिव बैल अर्थात धर्म की सवारी व भस्म लगा अर्थात काम को शान्त कर गृहस्थ आश्रम में प्रवेश करते हैं। इसीलिए विरोधाभास विचारधारा वालों (बैल, सिंह, चूहा, सर्प और मोर) के बीच रहकर भी शिव का परिवार परम् शान्ति को प्राप्त हैं।
अतः गृहस्थ धर्म (स्वच्छता,आतिथ्य और धर्म, समाज एवं राष्ट्र हेतु धर्मायुक्त आय का दस प्रतिशत दान) को सत्य प्रतिशत अपनाने वाले गृहस्थी ही हरिश्चंद्र, रघु, अम्बरीष, परशुराम, ध्रुव, विश्वामित्र, अनुसुइया, नर्मदा, सीता, उर्मिला, पार्वती आदि जैसे पुत्र पुत्री व भगवान को प्राप्त करते हैं। अवसर पर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र शाहाबाद प्रभारी डॉक्टर प्रवीण दीक्षित ने विधिवत पूजन अर्चन किया तथा अवधेश बाबू मिश्रा, रमा शुक्ला, इंदिरा शुक्ला, अर्पित गुप्ता, सुधा मिश्रा, पीयूष गुप्ता, रामाकांति मिश्रा, शान्ति शुक्ला दुर्गावती किरण रस्तोगी, धीरज मिश्रा राजकुमार कश्यप आशुतोष रस्तोगी रामू गुप्ता आज भक्ति बंधु उपस्थित रहे।