
बागपत। देश भर में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की क़ानून व्यवस्था की तारीफ़ यूं ही नहीं होती है। सीएम योगी की क़ानून व्यवस्था से जुड़ा ऐसा ही एक मामला बागपत से सामने आया है जहां 30 साल पूर्व दलितों के पूर्वज बागपत के टांडा गांव से पांच परिवारों के लगभग 35 लोग दबंग पठानों के डर से हरियाणा के कुटेल में चले गए थे।
लेकिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की क़ानून व्यवस्था से प्रभावित होकर दर्जनों दलित आज बागपत कलेक्ट्रेट पहुंचे जहां उन्होंने ने डीएम से गुहार लगाते हुए गांव में रहने की मांग करते हुए दबंग पठानों के कब्जे से अपनी खेती की जमीन व घर कब्जा मुक्त कराने की मांग की है।दलित दीपक का कहना है की हमारे पूर्वजों को डराया गया। जिस कारण वह गांव से चले गए थे लेकिन अब उत्तर प्रदेश में क़ानून व्यवस्था बहुत अच्छी है जिस वजह से हम अपने पैतृक गांव टांडा में रहना चहाते है।
बागपत प्रशासन हमारी खेती की जमीन व घर की जमीन दिलवा देगा तो हम अपने गांव में रहकर अपना जीवन यापन कर सकेंगे। वहीं दलित रेखा का कहना है की पहले लोग दलितों को जाती सूजक शब्द व उनके साथ गलत व्यवहार करते थे जिस कारण हमारे पूर्वज गांव से अपनी सम्पत्ति छोड़कर चले गए थे जिसका गांव के ही लोगों ने फर्जी तरीके से बैनामा भी करवा लिया है, लेकिन अब हम सीएम योगी के कारण हम सब अपने गांव टांडा में आना चाहते है क्योंकि हम हरियाणा में किराये के मकान में रहकर महंत मजदूरी कर रहे है अब हमारा वहां पर गुजारा नहीं हों रहा है।
हम चहाते है की प्रसाशन हमारी मदद दें और हमारी घर और जमीन दिलवा दें जिससे की हम अपने परिवार का सही तरीके से जीवन यापन कर सकें। वहीं ज़ब ग्राम प्रधान नवाजिस आलम से बात की गईं तो उनका कहना है की गांव से काफी समय पहले दलित समाज के लोगों को गांव से निकाल दिया गया था और उनके मकान व जमीन भी गांव के एक दबंग परिवार ने दबाई हुई है।
गांव का ही दबंग परिवार मेरे पास भी दो महीने पहले आया था उसने मेरे से कहा था की आप एक लेटर पेड़ पर लिख दो की वह दलित नहीं वह कश्यप है लेकिन मैंने ऐसा नहीं किया मैंने साफ मना कर दिया और सीएम योगी के सख्त निर्देश है की किसी भी जाती का हों उसे प्रताड़ित नहीं होने दिया जायगा प्रधान ने कहा की जो हमारे मुखिया योगी का आदेश है वो ही हमारा है अगर दलित परिवार गांव में आना चाहता है तो उनकी पूरी मदद की जाएगी।