
इमरान हुसैन/दैनिक भास्कर
रामपुर। 14 अप्रैल को बाबा भीमराव अंबेडकर की जन्मदिन पूरे देश में हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है वही वर्क आर्गेनाइजेशन रिलीजियस एंड नॉलेज ने 18 अप्रैल को बाबा साहब की जयंती अनोखे रूप में मनाई जिसकी सभी दलित समाज के लोगों ने सरहाना की दलित समाज के साथ मुस्लिमो ने मिलकर रोज़ा इफ़्तार का कार्यक्रम रखा। वाल्मीकि समाज के लोगो ने अब्दुल्लाह तारीक़ को अपने हाथों से खाना खिलाया व डॉ. भीमराव अंबेडकर का जन्म दिवस मनाया इस मौके पर राष्ट्रीय अध्यक्ष सैयद अब्दुल्लाह तारीक का कहना था वर्क एक गैर राजनीतिक संस्था है इस समय यहां बहुत से लोग ऐसे मौजूद है जो किसी ना किसी रूप में किसी राजनीतिक पार्टी से संबंध रखते हैं लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि वर्क यह राजनीतिक फायदे के लिए कार्य कर रही है बल्कि हम संप्रदायिक सौहार्द व करुणा का कार्य हमेशा से करते रहे हैं और यह कार्य को रामपुर व देश में करते हुए हमें 35 साल हो चुके हैं साथ ही उन्होंने कहा कि साथ में बैठकर खाने से छुआछूत दूर नहीं होगी बल्कि हमें एक थाली में खाना पड़ेगा तभी छुआछूत दूर हो सकेगी डॉक्टर भीमराव अंबेडकर एक अभियान है एक मिशन थे और भारत के संविधान निर्माता थे जिनका पूरा जीवन संघर्षों और कठिनाइयों से भरा हुआ है आज के समय में मौजूदा हालात में मुसलमानों को खासकर दलितों को डॉक्टर भीमराव अंबेडकर से मार्गदर्शन प्राप्त करना चाहिए व छुआछूत को दूर करना चाहिए शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ना चाहिए और हर वह कार्य करना चाहिए जिससे समाज का कल्याण हो सके। इस मौके पर बसपा के पूर्व दर्जा राज्यमंत्री सुरेंद्र सिंह सागर भी मौजूद रहे व वाल्मीकि समाज से समाज सेवी प्रतिनिधि मौजूद रहे पूर्व दर्जा मंत्री ने भी इफ्तार पार्टी की सराहना की और साथ मिलकर इफ्तार पार्टी मनाई पूर्व दर्जा मंत्री ने साथ ही यह भी कहा कि मुसलमानों का और दलितों का एक होना बहुत आवश्यक है सामाजिक कार्यकर्ता संदीप बौद्ध जोकि हापुड़ से आए थे उन्होंने भी अपने विचार रखते हुए कहा कि हम उस समय से आते हैं जिसने कई साल दक्ष झेला है व छुआछूत का शिकार रहे हैं लेकिन हमें वोट देने का अधिकार और बराबरी का अधिकार बाबा भीमराव अंबेडकर ने दिया है यदि आज के समय बाबा भीमराव अंबेडकर को मुस्लिम समाज याद करता है क्योकि उतना ही योगदान मुस्लिम समाज के लिए भी है जितना दलित समाज के लिए बाबा साहब ने सर्व समाज के लिए कार्य किया है।











