सबका साथ सबका विकास, पर दिव्यांग दम्पत्ति फिर भी निराश

आवास,पैंशन, राशन सहित किसी भी सरकारी योजना का दिव्यांग दम्पत्ति को नहीं मिला कोई भी लाभ

मेहंदी हसन

बागपत। भाजपा ही नहीं उसकी केंद्र और प्रदेश सरकारें भी गरीबों के लिए मकान, राशन, पैंशन या रोजगार जैसी योजनाओं का कितना भी ढिंढोरा पीटते हुए अपने मुंह मियां मिट्ठू बन बैठे हों, पर हकीकत यह भी है कि, प्रशासनिक अधिकारी, जनप्रतिनिधि या कोई भी कार्यकर्ता अंजू और सतीश दिव्यांग दम्पति को सभी ने उसकी बदनसीबी पर तरस नहीं खाया, न ही कोई सहारा बन पाया।पिछले करीब पंद्रह बरस से दिव्यांग दंपति अंजू व सतीश, खेकड़ा नगर में रह रहे हैं। किराए का मकान, उसका भी डेढ साल से किराया भी नहीं दे पाए हैं, बच्चों का पालन पोषण तक कठिन हो रहा है, रोजगार है नहीं,नगर पालिका क्षेत्र का अपना आधार कार्ड तो इनके पास है, लेकिन राशन कार्ड तक बनवाने के लिए भाजपा या कोई सामाजिक संगठन इनका सहयोगी नहीं बना। सरकारी योजनाओं का प्रचार- प्रसार और सबका साथ – सबका विकास, जैसा आकर्षक उद्घोष इस दिव्यांग दम्पति का मानो उपहास उडाता हो, तभी तो अपना दुखड़ा बयां करते हुए अंजू की आंखें कई बार डबडबाई।अपने दो अबोध व मासूम बच्चों को लेकर जब यह दिव्यांग परिवार कलेक्ट्रेट आया ,तब उनसे आने के कारण से लेकर सरकार द्वारा उन्हें मिल रही सुविधाओं के बारे में पूछा गया।अंजू का कहना था कि उनके लिए न तो राशन कार्ड बन सका, न सरकार द्वारा गरीबों को मिलने वाली पैंशन या फिर दिव्यांग के लिए कोई ओर सुविधा उन्हें नहीं मिल सकी है
वहीं किसी ने इस दिव्यांग दम्पत्ति के लिए दिव्यांग कार्ड, आयुष्मान कार्ड बनवाने तक के लिए ले जाना तो दूर कभी संपर्क भी नहीं किया।अपनी बदनसीबी पर खुद ही आंसू बहाने को मजबूर दिव्यांग सतीश दम्पत्ति आज ई रिक्शा के जरिये कलेक्ट्रेट इसीलिए पहुंचे कि उन्होंने जिलाधिकारी राजकमल यादव की सहृदयता और सरकारी योजनाओं को पात्र व्यक्ति तक पहुंचाने की लगन के चलते, शायद उनके भाग्य की बदनसीबी दूर हो सके।

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