
दो दिन से विद्यालय में नहीं बन रहा मिड-डे मील (मध्याह्न भोजन)
रिपोर्ट- नवीन गौतम
हापुड। नगर क्षेत्र के एक स्कूल में दो दिनों से शनिवार व आज सोमवार को नहीं बना मिड-डे मील/मध्याह्न भोजन। जिस कारण नन्हे मुन्नों को भूखे रहकर ही पढ़ाई करने को मजबूर हैं। स्कूल में मिलने वाले भोजन की आस में बच्चे घर से भी खाना नही ला रहे हैं। वही नाराज अभिभावकों का कहना है कि अगर बता दिया जाए कि स्कूल में भोजन नही मिलेगा तो वह बच्चों को घर से खाना लेकर भेजेंगे, जिससे उनके बच्चों को भूखा तो नही रहना पड़ेगा।
वहीं, विद्यालय के रसोईघर बंद पड़ा है। प्रधानाध्यापक को बच्चों के मध्याह्न भोजन की चिंता नहीं है। विभाग के जिम्मेदार भी मौन साधे हुए हैं। प्रधानाध्यापक विद्यालय में रसोइया की व्यवस्था नही होने का हवाला दे रही हैं। सम्बंधित अधिकारी भी कार्रवाई का हवाला देकर पल्ला झाड़ते हुए। सरकार की इस महत्वपूर्ण योजना को पलीता लगाने में लगे हुए हैं। सरकार ने मिड-डे मील/मध्याह्न भोजन देने का फैसला लिया है, लेकिन प्राथमिक विद्यालय शिवगढ़ी में दो दिन से बच्चो को मध्याह्न भोजन नही दिया गया है।
क्या बोले अधिकारी
मध्याह्न भोजन (मिड-डे मील) प्रभारी ललित कुमार मुसालिया ने बताया कि विद्यालय में दो दिन से भोजन न बनने की जानकारी नही है। अगर ऐसा है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
क्या बोली बीएसए
बेसिक शिक्षा अधिकारी अर्चना गुप्ता ने बताया कि सभी जनपद के सभी विद्यालय में मि-डे-मिल समयानुसार बनाया जाता हैं। अगर प्राथमिक विद्यालय शिवगढ़ी में दो दिन से बच्चों को भोजन नही बन रहा है तो कठोर कार्रवाई की जाएगी।
- मिड डे मील योजना उद्देश्य / महत्व
मिड डे मील बच्चों से जुड़ी हुई योजना है जिसका मकसद बच्चों को अच्छा भोजना मुहैया करवाना है और इस स्कीम के उद्देश्य इस प्रकार हैं-
- बच्चों का बेहतर विकास हो
आज भी हमारे देश में कई ऐसे लोग हैं जो कि अपने परिवार को दो वक्त का खाना देने में असमर्थ हैं। जिसके कारण इन परिवार से नाता रखने वाले छोटे बच्चों का मानसिक विकास पूरा नहीं हो पाता है। इसलिए सरकार, सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले गरीब बच्चों को मिड डे मील के जरिए पोषक भोजन उपलब्ध करती हैं ताकि उनका अच्छे से विकास हो सके।
- ज्यादा से ज्यादा बच्चे स्कूल आ सकें
जो दूसरा सबसे बड़ा उद्देश्य मिड डे मील का है वो शिक्षा से जुड़ा हुआ है। इस स्कीम के जरिए बच्चों को खाना उपलब्ध करवाया जाता है और ऐसा होने से कई गरीब परिवार ने अपने बच्चों को स्कूल भेजना स्टार्ट कर दिया है।
- सूखा प्रभावित क्षेत्रों के बच्चों को खाना मुहैया करवाना
इस स्कीम के तहत जिस दिन भी स्कूल खुले रहते हैं, उस दिन बच्चों को भोजना करवाना अनिवार्य होता हैं। वहीं गर्मी की छुट्टियों में स्कूल बंद होने के कारण बच्चों को भोजन नहीं मिल पाता है। लेकिन साल 2004 में सरकार ने गर्मी की छुट्टियों के दिन भी इस स्कीम को सूखा प्रभावित क्षेत्रों के स्कूलों में चलाए रखने का आदेश दिए थे। जिसके बाद से इन इलाकों के बच्चों को गर्मियों की छुट्टियों में भी भोजन दिया जाता था।










