
US Trade Deal : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को एक बड़ा झटका लगने वाला है, क्योंकि एक ओर यूरोपीय संघ (EU) भारत के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) की घोषणा करने जा रहा है, वहीं दूसरी ओर अमेरिका-ईयू के बीच चल रही ट्रेड डील को लेकर संकट पैदा हो सकता है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, बुधवार को फ्रांस के स्ट्रॉसबर्ग में यूरोपीयन पार्लियामेंट अमेरिका के साथ ट्रेड डील को सस्पेंड करने का ऐलान कर सकती है।
यह व्यापार समझौता, जो पिछले साल जुलाई में स्कॉटलैंड में हुआ था, उसमें अमेरिका ने यूरोपीय देशों के सामानों पर टैरिफ 30 प्रतिशत से घटाकर 15 प्रतिशत कर दी थी। बदले में, यूरोपीय देशों ने अमेरिका में निवेश और अमेरिकी निर्यात को बढ़ावा देने के लिए इस समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। लेकिन अब, ट्रंप ग्रीनलैंड को लेकर अपनी रणनीति बदल रहे हैं और अगले महीने से यूरोप पर दबाव बनाने के लिए 10 प्रतिशत टैरिफ बढ़ाने का ऐलान किया है, ताकि यूरोपीय देश उनके समर्थन में आएं।
डोनाल्ड ट्रंप ने आठ यूरोपीय देशों पर नए टैरिफ लगाने का निर्णय लिया है। 1 फरवरी से इन देशों के सामानों पर अमेरिका 10 प्रतिशत का टैरिफ लगाएगा, जिसमें डेनमार्क, नॉर्वे, स्वीडन, फ्रांस, जर्मनी, यूनाइटेड किंगडम, नीदरलैंड्स और फिनलैंड शामिल हैं। ये वही देश हैं जिन्होंने ग्रीनलैंड पर ट्रंप के नियंत्रण के फैसले का विरोध किया है। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि इन देशों पर टैरिफ लगाया जाएगा और यह बढ़ भी सकता है।
ग्रीनलैंड पर कब्जा करने की चाह क्यों?
डोनाल्ड ट्रंप का मानना है कि इस क्षेत्र में चीन और रूस की गतिविधियां बढ़ने से अमेरिका को खतरा हो सकता है, इसलिए वह जल्द से जल्द ग्रीनलैंड पर अमेरिकी नियंत्रण चाहता हैं। ग्रीनलैंड, दुनिया के सबसे बड़े द्वीपों में से एक, करीब तीन सौ साल से डेनमार्क का हिस्सा है। 1979 में डेनमार्क ने इसे स्वायत्तता दी, जिसमें विदेश, रक्षा और आर्थिक मामलों से जुड़े मुद्दे छोड़कर बाकी निर्णय ग्रीनलैंड लेता है। ग्रीनलैंड नॉर्थ अटलांटिक ट्रीटी ऑर्गेनाइजेशन (NATO) का हिस्सा है, इसलिए वहां अमेरिकी सैनिकों की तैनाती हुई है।
ब्रिटेन और फ्रांस जैसे यूरोपीय देशों ने ट्रंप के इस फैसले का विरोध किया है। फ्रांस के विदेश मंत्री ने इसे ब्लैकमेलिंग करार दिया है। वहीं, भारत और यूरोपीय संघ के बीच 27 जनवरी को एफटीए की आधिकारिक घोषणा होने जा रही है। इस समझौते के तहत दोनों पक्ष अपने बाजारों में व्यापार को आसान बनाने, टैरिफ को कम या बिना टैरिफ के सामानों का आदान-प्रदान सुनिश्चित करेंगे।
एफटीए के बाद, भारतीय सामान यूरोपीय संघ के 27 देशों के बाजारों में कम या बिना टैरिफ के पहुंच सकेंगे, जबकि यूरोपीय माल भारत में भी इसी तरह पहुंच पाएंगे। उल्लेखनीय है कि अमेरिका ने भारत पर भी टैरिफ लगा रखा है; रूस से तेल खरीदने पर ट्रंप ने भारत पर 50 प्रतिशत का टैरिफ लगाया है।















