
लखनऊ। राज्य सरकार की सख्ती पर प्रदेश में राजस्व वादों के निस्तारण में ऐतिहासिक प्रगति दर्ज की है। एक साल (एक अप्रैल-24 से चार अप्रैल-25) तक 230.8 लाख वादों का निस्तारण किया गया, जिसका अनुपात 95.37 प्रतिशत रहा है। जो अप्रैल 2024 तक (92.80फीसद) की तुलना में 2.57 प्रतिशत अधिक है। राजस्व संबंधी मामलों के निस्तारण में वाराणसी, गोण्डा और संतकबीरनगर ने बाजी मारी है।
मुख्य सचिव हर माह राजस्व वादों के मामलाें को लेकर समीक्षा बैठक करते हैं। हाल ही में राजस्व संबंधी मामलों की समीक्षा में सामने आया कि एक अप्रैल 2024 तक कुल लंबित वादों की संख्या 15.1 लाख थी, जो घटकर चार अप्रैल 2025 को 11.2 लाख रह गई। यह 3.9 लाख वादों की कमी को दर्शाता है। इसके अलावा एक वर्ष से कम समय से लंबित वादों में 80 हजार, दो वर्ष से अधिक में 1.6 लाख, तीन वर्ष से अधिक में 80 हजार और पांच वर्ष से अधिक पुराने वादों में 70 हजार की कमी आई है। वाराणसी ने पिछले एक साल में 5,31,406 मामलों को निस्तारण कर पूरे प्रदेश में पहला स्थान प्राप्त किया है। इसको अनुपात 97.76 प्रतिशत है।
इसी तरह गोण्डा ने 4,65,279 मामलों का निस्तारण कर दूसरा स्थान प्राप्त किया है। इसका अनुपात 97.27 प्रतिशत है। संतकबीरनगर ने 1,99,246 मामलों को निस्तारित कर तीसरा स्थान प्राप्त किया है, जिसका अनुपात 95.77 प्रतिशत है। इसके अलावा जौनपुर ने चौथा और प्रतापगढ़ ने पांचवां स्थान प्राप्त किया है। लखनऊ में जहां पिछले वर्ष अप्रैल-24 तक 8,11,132 मामलों का निस्तारण हुआ हैं। वहीं चार अप्रैल-2025 तक 9,73,838 वादों का निस्तारण किया गया, यानी 1,62,706 अधिक मामलों का निस्तारण किया गया है।। इसी तरह प्रयागराज ने चार अप्रैल-25 तक 7,06,163 वादों और गोरखपुर में 6,12,871 मामलों का निस्तारण किया गया। सरकार की प्राथमिकता का ही असर है कि मामलों के निस्तारण से न्यायिक प्रक्रिया में लोगों का विश्वास बढ़ा है। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री योगी की मंशा के अनुरूप राजस्व वादों के त्वरित निस्तारण में पारदर्शी प्रक्रिया, ई-गवर्नेंस, डिजिटल रिकॉर्ड मैनेजमेंट और जिलाधिकारियों की निगरानी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। डिजिटल माध्यम से निगरानी, समयबद्ध कार्रवाई और नियमित समीक्षा बैठकों ने इस सफलता को संभव बनाया है।