मौसम की बेरुखी: नहीं खिला बुरांश

चमोली। मौसम की बेरुखी पहाड़ी क्षेत्र के काश्तकार ही नहीं झेल रहे बल्कि यहां के पेड़ पौधों पर भी इसका असर देखने को मिल रहा है। उत्तराखंड के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में पाये जाने वाले राज्य वृक्ष बुरांश (रोडोडेन्ड्रोन आरबेरियम) पर भी मौसम की बेरुखी का असर देखने को मिल रहा है। जहां बसंत के आगमन के साथ ही इन दिनों पहाड़ियों पर बुरांश के फूल खिल जाते थे। वहीं इस बार अत्याधिक बर्फवारी से बुरांश की कोंपलें भी नहीं खिल सकी हैं।
चमोली जिले में अमूमन फरवरी माह के अंतिम सप्ताह तक बुरांश के फूलों को खिलना शुरु हो जाता था, लेकिन इन दिनों मार्च के मध्य तक भी जिले में बर्फवारी और बारिश थमने का नाम नहीं ले रही है। ऐसे में बुरांश के फूलों के खिलने के लिये उपयुक्त तापमान न मिलने से पेड़ों पर कोंपलें भी खराब होने लगी हैं। जिससे साफ है कि इस वर्ष बुरांश की रंगत और जूस से लोगों को महरुम रहना पड़ेगा।

 

क्या कहते हैं जानकार
बुरांश (रोडोडेंड्रोन आरबेरियम) की फ्लावरिंग इस वर्ष अत्याधिक ठंड के चलते नहीं हो पाई है। बुरांश के फूल को फ्लावरिंग के लिये 20 से 25 डिग्री तक तापमान की जरुरत होती है। ऐसे में राज्य के ईस्टन स्लोप वाले वनों में कुछ स्थानों पर बुरांश खिला है, लेकिन कम तापमान वाले क्षेत्रों में बुरांश नहीं खिल पाया है। जिससे इस वर्ष फूलों की उपज बीते वर्षों की अपेक्षा बहुत कम मात्रा में रहने के आसार हैं- डा. विनय नौटियाल, विभागाध्यक्ष, वनस्पति विज्ञान, श्रीदेवी सुमन विवि परिषर गोपेश्वर-चमोली।

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